मंगलवार, 29 मई, 2007 को 23:28 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ,
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान
राजस्थान में आरक्षण की माँग कर रहे गूजर समुदाय के लोगों पर पुलिस गोलीबारी के बाद वहाँ के कई ज़िलों में तनाव है.
पुलिस और गूजर समुदाय के बीच मंगलवार को हुए संघर्ष में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और अनेक लोग घायल हुए हैं.
मारे गए लोगों में 12 आम नागरिक हैं और दो पुलिसकर्मी हैं. लोगों की मौत पुलिस फ़ायरिंग से हुई.
इस घटना के बाद राज्य में कई स्थानों पर स्थिति गंभीर हो गई है और नियंत्रण के लिए कुछ स्थानों पर सेना और अर्धसैनिक बलों को भेजा गया है.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मंगलवार देर रात जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती घायलों को देखने गईं. वहाँ मौजूद गूजर समुदाय के लोगों ने उनका विरोध किया और उनके ख़िलाफ़ नारेबाजी की.
बचाव
दूसरी ओर राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने पुलिस गोलीबारी का बचाव किया है.
उनका कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे और उन्होंने पुलिस पर भारी पथराव किया.
कटारिया का कहना था कि अभी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है और हम इस पर नज़र रखे हुए हैं.
दूसरी ओर कांग्रेस ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के इस्तीफ़े की माँग की है.
कांग्रेस के नेता अशोक गहलौत ने गूजर समुदाय के लोगों पर पुलिस गोलीबारी के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ज़िम्मेदार ठहराया है और उनके इस्तीफ़े की माँग की.
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री पिछले 20 दिन से राज्य से बाहर हैं और यदि गूजर समुदाय के लोगों को बातचीत के लिए बुला लिया जाता तो यह घटना टाली जा सकती थी.
गूजरों की मांग
हिंसा की घटना उस समय हुई जब जयपुर आगरा राजमार्ग के पास दौसा और बूदी ज़िले में प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका और पुलिस से उनकी झड़प हुई.
गूजर समुदाय के लोग अनुसूचित जनजाति के तौर पर आरक्षण दिए जाने की मांग कर रहे है. हालांकि गूजर जाति के लोग पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आते हैं.
राजस्थान में गूजर समुदाय काफी प्रभावशाली माना जाता है और आंदोलन के और तेज़ होने के आसार व्यक्त किए जा रहे हैं.
समुदाय ने मंगलवार को आठ ज़िलों में बंद का आह्वान किया था और इसे देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे.
विभिन्न राजमार्गों के एक किलोमीटर की परिधि में निषेधाज्ञा लगा दी गई थी और अनेक लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया था.
उधर अनुसूचित जनजाति में शामिल जातियां गूजरों को आदिवासी का दर्ज़ा दिए जाने का विरोध कर रही हैं.