वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की सुनवाई कर रही विशेष टाडा अदालत ने मंगलवार को चार पूर्व कस्टम अधिकारियों समेत सात दोषियों को सज़ा सुनाई है.
लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने संवाददाताओं को बताया कि कस्टम विभाग के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर (कस्टम) आरके सिंह, पूर्व अधीक्षक मोहम्मद सुल्तान सैय्यद और पूर्व अधीक्षक सुधानु तलवडेकर और पूर्व निरीक्षक जयवंत गुराव को हथियारों की खेंप पहुँचाने में मदद करने का दोषी पाया गया.
इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति ज़मीर सैय्यद इस्माइल कादरी को षडयंत्र रचने का दोषी करार देते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है. साथ ही उन पर डेढ़ लाख रुपए का ज़ुर्माना भी किया गया है.
विशेष टाडा कोर्ट के न्यायाधीश पीडी कोडे ने कादरी को फ़रार मोहम्मद दौसा का क़रीबी सहयोगी पाया.
अन्य दो व्यक्तियों, अयूब इब्राहिम क़ुरैशी और अहसान मोहम्मद क़ुरैशी को अवैध हथियार रखने का दोषी पाया गया.
अहसान और अयूब क़ुरैशी को उनके पास से अवैध पिस्तौल मिलने का दोषी पाते हुए उन्हें पाँच साल के कारावास की सज़ा दी गई. साथ ही उन्हें 25 हज़ार रुपए बतौर ज़ुर्माना भी भरने का फ़ैसला सुनाया गया है.
पूर्व अफ़सर दोषी
कोर्ट ने आरके सिंह को पैसा लेकर हथियारों की खेंप पहुँचाने में मदद का दोषी पाते हुए उन्हें नौ साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई.
साथ ही उन पर तीन लाख़ का ज़ुर्माना भी किया गया है. ज़ुर्माना न भरने की स्थिति में उनकी सज़ा चार साल और बढ़ जाएगी.
कस्टम विभाग के पूर्व अधीक्षक तलवडेकर को आठ साल की सज़ा सुनाई गई. उन पर दो लाख रुपए का ज़ुर्माना भी किया गया.
कोर्ट ने कस्टम विभाग के एक अन्य पूर्व अधीक्षक सुल्तान सैय्यद को सात साल की सज़ा और एक लाख रुपए के ज़ुर्माने से दंडित किया.
कस्टम विभाग के पूर्व निरीक्षक गुराव को आठ साल का कठोर कारावास और एक लाख़ रुपए का ज़ुर्माना किया गया.
मुंबई विस्फोट
1993 में मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे.
इन धमाकों में 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे. अदालत ने इस मामले में कुल 100 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया.
इन्हीं अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं. टाडा अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत तो दोषी ठहराया लेकिन आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया है.