मंगलवार, 29 मई, 2007 को 18:03 GMT तक के समाचार
अकाल तख्त ने डेरा सच्चा सौदा के माफ़ीनामे को नामंज़ूर कर दिया है. साथ ही अकाल तख़्त ने डेरे का सामाजिक बहिष्कार जारी रखने की भी घोषणा की है.
अकाल तख़्त पर पाँच तख़्तों के जत्थेदारों की सात घंटे चली बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया.
इसमें डेरा सच्चा सौदा की ओर से मांगी गई माफी़ की शब्दावली पर आपत्ति जताई गई और कहा गया कि माफ़ीनामे की भावना ठीक नहीं है.
सिख धार्मिक नेताओं ने कहा है कि यदि माफ़ी सही भावना और दिल से मांगी जाए तो गुरु (गोविंद सिंह) माफ़ कर देते हैं.
इस बैठक में अकाल तख़्त ( अमृतसर), केशगढ़ साहब (आनंदपुर साहब), पटना साहब (पटना), दमदमा साहब (तलवंडी साबो) और तख़्त हज़ूर साहब (नांदेड) के जत्थेदार मौजूद थे.
इनके अलावा बैठक में दमदमी टकसाल और कुछ अन्य सिख संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.
सिंह साहिबान ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से वकीलों के एक ऐसे पैनल को गठित करने को कहा है जो डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और डेरे के ख़िलाफ़ मामलों को आगे बढ़ाए.
'संघर्ष जारी रहेगा'
साथ ही पुरानी घोषणा के अनुसार शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी का 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 31 मई को पंजाब और हरियाणा के राज्यपालों से चंडीगढ़ में मिलेगा और डेरे की गतिविधियों के ख़िलाफ़ उन्हें ज्ञापन देगा.
सिख धार्मिक नेताओं ने घोषणा की कि डेरे के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा.
उनका कहना था कि डेरे का सामाजिक बहिष्कार जारी रहेगा और जो लोग डेरे के अनुयायी बन गए हैं, उन्हें वापस मुख्यधारा में आ जाना चाहिए.
इस बीच, डेरा समर्थकों और सिखों में टकराव की आशंका के मद्देनज़र पंजाब में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
इसके पहले रविवार को डेरा सच्चा सौदा के गुरु गुरमीत राम रहीम सिंह ने गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांगी थी.
डेरा सच्चा सौदा की ओर से जारी बिना किसी हस्ताक्षर के एक संक्षिप्त बयान में कहा गया था कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख की गुरु गोविंद सिंह के जैसा दिखने या उनकी नकल करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी.
बयान में कहा गया था कि इस मामले पर हुई घटनाओं पर पहले ही खेद व्यक्त कर दिया गया था लेकिन लोगों के हित और शांति के लिए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरु गोविंद सिंह से माफ़ी मांगते हैं.
डेरे विवाद
दरअसल सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह के कथित रूप से गुरु गोविंद सिंह जैसा लिबास पहनने को लेकर विवाद शुरू हुआ था.
पंजाब में इसके विरोध में उग्र प्रदर्शन हुए तो डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी भी सड़कों पर उतर आए. कई जगह दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़पें हुई.
विवाद के ज़ोर पकड़ने के बाद 17 मई को तलवंडी में सिख समुदाय की एक बड़ी सभा में हुक्मनामा जारी किया गया था कि डेरा सच्चा सौदा का सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक बहिष्कार किया जाए.
भठिंडा में तो गुरमीत बाबा राम रहीम सिंह के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत मामला भी दर्ज किया गया है.
उन पर धर्म विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे का आरोप लगाया गया है.
लेकिन 20 मई को अमृतसर में अकाल तख़्त की बैठक में माँग की गई थी कि 27 मई तक राज्य में डेरा सच्चा सौदा की सब शाखाएँ बंद कर दी जाएँ.