शनिवार, 26 मई, 2007 को 04:37 GMT तक के समाचार
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की.
इसके बाद उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ सहयोग के रास्ते पर चलेगी.
मायावती का कहना था, "मुलायम सिंह केंद्र सरकार के साथा टकराव के रास्ते पर चल रहे थे लेकिन मेरी सराकर सहयोग के रास्ते पर चलेगी."
उन्होंने कहा, "मेरी पार्टी राजनीति को प्रदेश के विकास में बाधा नहीं बनने देगी."
मायावती मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री से मिली हैं. हालाँकि यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से उन्होंने शुक्रवार शाम को भी मुलाक़ात की थी.
शनिवार को जब वो मनमोहन सिंह से मिल रही थीं तभी यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी वहाँ पहुँची.
माना जा रहा है कि तीनों नेताओं ने राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर बातचीत की. इन चुनावों में बसपा की भूमिका अहम होगी.
कुछ विश्लेषक ऐसा भी मानते हैं कि ताज कॉरिडोर मामले में सीबीआई की जाँच से गुज़र रहीं मायावती इस दौरे के दौरान केंद्र सरकार की मंशा की भी टोह लेना चाहती हैं.
राष्ट्रपति चुनाव
हालांकि मायावती के दिल्ली दौरे को केंद्र के नेताओं से एक औपचारिक मुलाक़ात बताया गया था पर विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अहम चर्चा हो रही है.
दरअसल, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव परिणामों ने साफ़ कर दिया है कि राष्ट्रपति चुनाव में मायावती की भूमिका निर्णायक होगी.
पर मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि इस संबंध में उन्होंने अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है और वो समय आने पर 'अपने पत्ते खोलेंगी'.
राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और विभिन्न ज़िलों के पदाधिकारियों की शुक्रवार को एक बैठक भी हुई पर बैठक में क्या तय हुआ है, इसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.
शुक्रवार को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौराम मायावती ने कहा था कि वो और उनकी पार्टी यूपीए के घटक दल नहीं हैं लेकिन सांप्रदायिक ताक़तों को रोकने के लिए हम सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे.
उनके इस बयान का यह मतलब भी निकाला जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनावों के लिए मायावती कम से कम एनडीए के किसी उम्मीदवार को तो समर्थन नहीं देंगी.