गुरुवार, 24 मई, 2007 को 02:42 GMT तक के समाचार
भारत में बाघों की घटती संख्या के बारे में लगातार दी जा रही चेतावनियों के बावजूद एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार बाघों की संख्या जैसी अपेक्षा थी उससे कहीं अधिक कम हुई है.
भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ राज्यों में बाघों की संख्या अपेक्षा से 65 प्रतिशत कम देखी गई है.
संस्थान पिछले दो वर्षों से बाघों की गिनती कर रहा है और अगले छह महीनों में यह कार्य पूरा होना है.
पिछली बार 2002 में जब बाघों की गिनती हुई थी तो यह संख्या साढे तीन हज़ार के लगभग थी लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या बहुत अधिक आंकी गई है.
बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2002 में बाघों की संख्या 710 थी जबकि इस समय यह संख्या 290 है.
इसी तरह महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों में बाघों की संख्या 238 से घटकर 95 रह गई है और राजस्थान में 58 से 32 हो गई है.
सिर्फ जिम कार्बेट नेशनल पार्क में ही बाघों की संख्या बेहतर देखी गई है जहां अभी भी 500 वर्ग किलोमीटर में 112 बाघ हैं.
संवाद समिति एपी के अनुसार भारतीय वन्यजीव संरक्षण संस्थान की बेलिंडा राइट कहती है कि ये परिणाम निराशाजनक तो हैं लेकिन कम से कम आकड़ों में यह तथ्य सामने आ रहा है.
सौ साल पहले बाघों की संख्या हज़ारों में थी लेकिन अब यह संख्या सैकड़ों में है.
अवैध शिकार और घटते जंगलों को इसका सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संरक्षण के उपायों के बावजूद बाघों की संख्या लगातार घट रही है.