बुधवार, 23 मई, 2007 को 09:38 GMT तक के समाचार
वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार धमाकों के पाँच दोषियों को विशेष टाडा अदालत ने बुधवार को छह से लेकर 14 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है.
बेंगाणी माइक्रोवेव टावर में चौकीदार तुलसीराम सुर्वे को नौ साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई और उन्हें 55 हज़ार रूपए का जुर्माना देने को कहा गया है.
सुर्वे को हथियारों की खेप मुंबई पहुँचाने में मदद करने का दोषी पाया गया.
लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने पत्रकारों को बताया कि टाडा कोर्ट के जज प्रमोद कोडे ने सुर्वे से पूछा, "तुम्हारा असली मालिक कौन है? सरकार या फिर तस्कर, जिन्हें तुमने सिर्फ़ 2000 रुपए में ही सरकारी सुविधा का इस्तेमाल करने दिया."
सुर्वे को दो मौकों पर हथियारों की खेप वाहनों में स्थानों में स्थानांतरित करने के लिए सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल करने देने का दोषी पाया गया.
दिघी तट पर हथियारों की खेप पहुँचाने का ज़िम्मा संभालने वाले उत्तर पोद्दार को 14 साल की जेल की सज़ा और मोहम्मद लाजपुरिया उर्फ़ मैकेनिक चाचा को दस साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है.
ऑटो चालक
दोनो पर डेढ़-डेढ़ लाख़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.
12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे.
अब्दुल अज़ीज़ घरातकर को छह वर्ष की क़ैद और 50 हज़ार रुपए के जुर्माने से दंडित किया गया.
84 वर्षीय अज़ीज़ को धमाकों से ठीक पहले विस्फोटकों को शेखाडी पहुँचाने में मदद करने का दोषी पाया गया.
एक अन्य अभियुक्त ऑटो रिक्शा चालक सज्जाद आलम को सात साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई. इसके अलावा उन्हें 50 हज़ार रुपए के जुर्माने से भी दंडित किया गया.
सज़ा
टाडा कोर्ट अभी तक 22 लोगों को सज़ा सुना चुकी है.
इससे पूर्व, मंगलवार को कोर्ट ने सब इंस्पेक्टर विजय पाटिल समेत सात अभियुक्तों को सज़ा सुनाई थी.
पाटिल को आपराधिक षडयंत्र रचने का दोषी पाया गया था.
अदालत ने सोमवार को चार पुलिसकर्मियों को छह वर्ष और एक अन्य अभियुक्त को 10 वर्ष क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
पुलिसकर्मियों को इन धमाकों के सिलसिले में रिश्वत लेने का दोषी पाया गया था. वहीं पांचवे व्यक्ति मंज़ूर अहमद पर आरोप था कि उसने संजय दत्त के घर एके-56 राइफ़ल पहुँचाने का काम किया था.
मंज़ूर अहमद को 10 वर्ष क़ैद और 50 हज़ार रूपए जुर्माने की सज़ा हुई है.
इन्हीं अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं. टाडा अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत तो दोषी ठहराया लेकिन आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया है.