मंगलवार, 22 मई, 2007 को 15:35 GMT तक के समाचार
रेहान फ़जल
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
यूपीए सरकार के तीन साल पूरे होने पर कोई बड़ा समारोह तो नहीं हुआ लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकार के कामकाज पर एक रिपोर्ट जारी की है.
इस रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से सरकार ने ख़ुद ही अपनी पीठ ठोकने की कोशिश की है.
इस रिपोर्ट में बढ़ती हुई कीमतों पर चिंता प्रकट की गई है. साथ ही सरकार ने आर्थिक मोर्चे और विदेश नीति पर अपनी सफलता के कसीदे पढ़े हैं.
वैसे कायदे से देखा जाए तो एक गठबंधन सरकार का सत्ता में तीन साल पूरे करना ही अपने आप में बड़ी उपलब्धि है.
ख़ास तौर से कांग्रेस सरकार के लिए जिसका गठबंधन सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं रहा है.
मनमोहन सिंह ने रिपोर्ट में मंहगाई रोकने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की चर्चा की है और इस बात पर संतोष व्यक्त किया गया है उनके शासन काल में विकास दर ख़ासी ऊँची रही है.
आम आदमी
लेकिन ऐसे समय में किसी के लिए भी यूपीए सरकार को जन्मदिन मुबारक कहना मुश्किल होगा जब उनके गठबंधन में ही कुछ आवाज़ें 'आम आदमी' के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहे हों.
गठबंधन सरकार में मंत्री मणिशंकर अय्यर ने जिस तरह से इस मुद्दे पर अपनी ही पार्टी को कठघरे में खड़ा किया उससे पार्टी का चिंतित होना स्वाभाविक है.
लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान इस बात से सहमत नहीं हैं.
वो कहते हैं,"ये उनका व्यक्तिगत विचार हो सकता है. सरकार के सभी निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए जाते हैं. जिसमें मणिशंकर अय्यर जी शामिल रहे हैं. लेकिन अगर उनका कोई सुझाव आता है तो उस पर भी मंत्रिमंडल में विचार किया जाएगा."
असंतोष
जब गठबंधन की शुरुआत हुई थी तो कहा गया था कि सोनिया गाँधी राजनैतिक मामलों को देखेंगी और मनमोहन सिंह प्रशासन चलाएंगे.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस व्यवस्था में खोट देखते हुए यहां तक कह डाला कि मनमोहन सिंह भारत के इतिहास में शायद सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री हैं.
आज के दिन भी वामपंथी दलों ने भी यूपीए सरकार से अपना अंसतोष छिपाया नहीं. हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया कि वो सरकार से समर्थन वापस नहीं लेंगे.
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी अतुल अनजान कहते हैं,"इस सरकार से आशाएं बहुत थीं. लोग बहुत प्यासे थे उन्होंने सोचा था कि इस सरकार में भरपूर पानी पीने को मिलेगा लेकिन इस सरकार ने ओस चटाई है. मैं सरकार को इसके प्रदर्शन पर इसे तीन अंक दूंगा."
पिछले साल की तरह इस बार भी मनमोहन सिंह यूपीए की तीसरी सालगिरह पर गठबंधन के नेताओं को रात के खाने पर बुला रहे हैं.
लेकिन मन में ये चिंता ज़रूर होगी कि आम चुनाव के लिए अब सिर्फ़ दो साल ही बचे हैं और पंजाब, उत्तरांचल और उत्तर प्रदेश के नतीज़ों को देखा जाए तो कांग्रेस के आने वाले दिन कठिन साबित होने वाले हैं.