मंगलवार, 22 मई, 2007 को 14:38 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, भठिंडा
पंजाब का शहर भठिंडा- जो सड़क आमतौर पर बहुत व्यस्त रहती है वो सूनी पड़ी है. मंगलवार को पंजाब की लगभग सभी सड़कों का यही हाल था.
बंद ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया. राज्य परिवहन की बसों के साथ ही निजी वाहन भी इक्का-दुक्का ही नज़र आए. आस- पास के राज्यों हरियाणा, दिल्ली या फिर हिमाचल प्रदेश से आने वाली बसें भी पंजाब नही आ पाईं.
दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थाएँ- सब कुछ बंद रहा, बाज़ारों में यहाँ वहाँ लोग ताश खेलते नज़र आए.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए थे. हांलाकि कुछ गुरूद्वारों मे भी़ड़ जमा हुई जो जूलूस निकालना चाहत थी पर पुलिस ने उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी.
हांलाकि पुलिस या प्रशासन ने किसी दुकानदार को बाज़ार खोलने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया. बल्कि बंद समर्थक कहीं कहीं पुलिस को खाने की दुकानों को भी बंद कराने के लिए कहते सुने गए.
एक तरह से इस बंद को सरकार की मौन स्वीकृति प्राप्त थी. पर कुल मिलाकर पंजाब बंद के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.
क़ानून व्यवस्था
पंजाब प्रशासन बंद के शांतिपूर्ण तरीके से निपट जाने पर थोड़ी राहत की सांस ज़रूर ले सकता है, पर उसके लिए कानून व्यवस्था बनाए रखना अभी भी चुनौती भरा काम है. क्योंकि सिख धार्मिक नेता या फिर डेरा सच्चा सौदा कोई भी इस विवाद को निपटाने के लिए आगे नही आ रहा है.
शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य जत्थेदार सुखदेव सिंह ने बीबीसी को बताया," जब तक डेरा सच्चा सौदा प्रमुख कि तरफ़ से माफ़ी नही माँगी जाती तब तक इस मसले पर तनाव बना रहेगा. "
उधर तख़्त दमदमा साहब के जत्थेदार बलवंत सिंह नंदगढ़ ने साफ़ कहा कि पंजाब से डेरे को हटाने के फ़ैसले को नहीं बदला जाएगा.
इस पूरे मसले पर प्रशासन का दावा है कि वो जल्दी ही स्थिति को सामन्य बनाने में कामयाब रहेगा.
लेकिन एकांत में पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने माना की आने वाले दिन उनके लिए कठिन हो सकते हैं.