मंगलवार, 22 मई, 2007 को 08:57 GMT तक के समाचार
1993 के मुंबई धमाकों के सिलसिले में विशेष टाडा अदालत ने एक सब इंस्पेक्टर को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.
छह अन्य अभियुक्तों को भी क़ैद की सज़ा हुई है.
टाडा अदालत ने सब इंस्पेक्टर विजय पाटिल को आपराधिक षडयंत्र रचने का दोषी पाया था.
लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने पत्रकारों को बताया कि विजय पाटिल ने 60 लाख रूपए घूस लेकर विस्फोटकों से लदे दो ट्रक मुंबई में घुसने की इजाज़त दी थी और वे चाहते तो हादसे को टाला जा सकता था.
उन्होंने कहा कि जज प्रमोद कोडे ने इस बात को गंभीरता से लिया कि पुलिस अधिकारी होते हुए भी पाटिल ने षडयंत्रकारियों को मदद पहुँचाने का संगीन अपराध किया.
निकम ने कहा कि पाटिल को दो अलग-अलग मामलों में उम्रक़ैद और एक-एक लाख रूपए जुर्माने की सज़ा सुनाई है लेकिन सज़ा साथ-साथ चलेगी. जुर्माने की राशि नहीं दिए जाने पर उन्हें तीन साल की जेल की सज़ा और काटनी होगी.
छह को क़ैद
सब इंस्पेक्टर पाटिल के अलावा मुंबई धमाकों से संबंधित मामलों में पाँच अभियुक्तों को छह-छह साल की सज़ा और एक अन्य अभियुक्त मोहम्मद रफ़ीक को सात साल की सज़ा सुनाई गई है.
इन सभी अभियुक्तों को 15-15 हज़ार रूपए जुर्माना भी अदा करना होगा.
पाँच अभियुक्तों को पाकिस्तान जाकर हथियारों की ट्रेनिंग लेने का दोषी पाया गया. हालाँकि इन्हें चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी नहीं पाया गया.
जबकि मोहम्मद रफ़ीक को हथियारों की ट्रेनिंग लेने के बाद भारत में वापस लौटने पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया.
इससे पहले अदालत ने मुंबई धमाकों के सिलसिले में सोमवार को चार पुलिसकर्मियों को छह वर्ष और एक अन्य अभियुक्त को 10 वर्ष क़ैद की सज़ा सुनाई थी.
पुलिसकर्मियों को इन धमाकों के सिलसिले में रिश्वत लेने का दोषी पाया गया था. वहीं पांचवे व्यक्ति मंज़ूर अहमद पर आरोप था कि उसने संजय दत्त के घर एके-56 राइफ़ल पहुँचाने का काम किया था.
मंज़ूर अहमद को 10 वर्ष क़ैद और 50 हज़ार रूपए जुर्माने की सज़ा हुई है.
1993 में मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे.
इन धमाकों में 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे. अदालत ने इस मामले में कुल 100 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया.
इन्हीं अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं. टाडा अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत तो दोषी ठहराया लेकिन आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया है.