सोमवार, 21 मई, 2007 को 21:54 GMT तक के समाचार
भारत में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार मंगलवार को सत्ता में अपना तीसरा साल पूरा करने जा रही है.
इस अवसर पर वामपंथी दलों के समर्थन से चल रही मनमोहन सिंह की सरकार अपनी उपलब्धियाँ गिनाएगी.
दूसरी ओर विपक्ष का मानना है कि यूपीए सरकार पूरी तरह नाक़ाम रही है.
इस मौक़े पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के कामकाज पर एक रिपोर्ट जारी करने जा रहे हैं.
इस रिपोर्ट की पहली प्रति यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भेंट की जाएगी. साथ ही इस मौक़े पर यूपीए के घटक दलों से विचार विमर्श किया जाएगा.
उपलब्धियाँ
यूपीए सरकार अपनी उपलब्धियों में रोज़गार गारंटी योजना, सूचना का अधिकार और आर्थिक वृद्धि दर आठ फ़ीसदी से ऊपर रखने को प्रमुख मानती है.
सरकार विदेश नीति के मोर्चे पर कई उपलब्धियाँ गिनाती है. अमरीका के साथ असैनिक परमाणु समझौता और पाकिस्तान के साथ शांति की पहल को वह बड़ी उपलब्धि मानती है.
माना जा रहा है कि जनता के बीच अब भी प्रधानमंत्री की छवि पाक साफ़ बनी हुई है. हालांकि उनकी सरकार को महँगाई के मुद्दे से जूझना पड़ रहा है.
लेकिन सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दल बढ़ती महँगाई, विदेशी पूंजी निवेश, निजीकरण, मज़दूरों और आदिवासियों के अधिकारों जैसे कई मुद्दों को लेकर नाख़ुश हैं.
वामपंथी दलों के समर्थन से ही यूपीए सरकार बनी और चल रही है. संसद में और उसके बाहर यूपीए के साथ वामदलों ने ‘कभी नरम कभी गरम’ की नीति अपनाई है.
विरोधी दल की राय
लेकिन मुख्य विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाती रही है.
भाजपा का मानना है कि यूपीए सरकार के बजाए भाजपा के विरोधी दल की तरह व्यवहार कर रही है.
भाजपा को सरकार पर वामपंथी दलों के दबाव को लेकर भी आपत्ति रही है.
इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा सरकार चलाने का यह पहला अवसर है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीए सरकार के लिए तीन साल का सफ़र अपने काम की समीक्षा का एक अवसर भी है और चुनौती भी.