सोमवार, 21 मई, 2007 को 08:27 GMT तक के समाचार
1993 के मुंबई धमाकों के सिलसिले में टाडा अदालत ने सोमवार को चार पुलिसकर्मियों को छह वर्ष की सज़ा सुनाई है.
इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति को 10 वर्ष क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
पुलिसकर्मियों पर इन धमाकों के सिलसिले में रिश्वत लेने का आरोप है और इन्हें छह-छह साल क़ैद और 25-25 हज़ार रूपए ज़ुर्माने की सज़ा सुनाई गई है.
वहीं पांचवे व्यक्ति मंज़ूर अहमद पर आरोप है कि उसने संजय दत्त के घर एके-56 राइफ़ल पहुँचाने का काम किया था. मंज़ूर अहमद को 10 वर्ष क़ैद और 50 हज़ार रूपए ज़ुर्माना की सज़ा हुई है.
ज़ुर्माने की रक़म अदा न कर पाने की सूरत में उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास दिया जाएगा.
जिन पुलिसकर्मियों को सोमवार को सज़ा सुनाई गई है उनके बारे में फ़ैसले में कहा गया है कि ये पुलिसकर्मी मुंबई बम धमाकों की साजिश में सीधे तौर पर शामिल नहीं पाए गए हैं.
विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने फैसला आने के बाद पत्रकारों को बताया कि इन पुलिसकर्मियों को हथियारों की तस्करी में शामिल होने का दोषी पाया गया है. ये पुलिसवाले जिस सब-इंस्पेक्टर के साथ थे, उन्हें आपराधिक षड्यंत्र में शामिल पाया गया है पर उन्हें अभी सज़ा नहीं सुनाई गई है.
सज़ा की शुरुआत
बीते सप्ताह शुक्रवार से 1993 के मुंबई बम धमाकों में दोषी करार दिए गए 100 अभयुक्तों को सज़ा सुनाने का काम शुरू हो चुका है.
टाडा अदालत ने सज़ा सुनाने की शुरुआत करते हुए पाँच दोषी लोगों को तीन-तीन साल क़ैद की सज़ा और 25-25 हज़ार रुपए ज़ुर्माने की सज़ा सुनाई थी.
1993 में मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे.
इन धमाकों में 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे. अदालत ने इस मामले में कुल 100 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया.
इन्हीं अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं. टाडा अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत तो दोषी ठहराया लेकिन आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया है.
सरकारी वकील निकम के मुताबिक सज़ा सुनाने की पूरी प्रक्रिया में आठ से 10 दिन का समय लग सकता है.