सोमवार, 21 मई, 2007 को 06:45 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित लाल मस्ज़िद मदरसे के कई और छात्रों को हिरासत में ले लिया गया है.
प्रशासन और लाल मस्जिद मदरसे के छात्रों के बीच हफ़्तों से जारी तनाव बना हुआ है.
मस्जिद में अभी पाँच सिपाही क़ैद हैं. मदरसे के छात्रों का कहना है कि इन सिपाहियों को तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जबतक कि उनके सभी साथियों को नहीं छोड़ दिया जाता.
शुक्रवार को मस्जिद के दर्ज़नों छात्रों ने पुलिसकर्मियों को जबरन मस्जिद में रोक लिया था. ये छात्र उन छात्रों की रिहाई की मांग कर रहे थे जिन्हें खुफिया एजेंसियों ने हिरासत में रखा है.
बाद में शनिवार को लाल मस्ज़िद मदरसे ने बंदी बनाए गए चार पुलिसकर्मियों में से दो को रिहा कर दिया था.
लेकिन सोमवार की शाम को मदरसे के छात्रों ने फिर से तीन पुलिसकर्मियों को बंदी बना लिया, इस तरह कुल पाँच पुलिसकर्मी मदरसे में बंद हैं.
प्रशासन ने मस्जिद के आसपास के रास्ते बंद करके बड़ी तादाद में सुरक्षाबल तैनात कर दिए वहीं मदरसे के छात्र भी हाथों में कुल्हाड़ी और लाठी लेकर मस्जिद और मदरसे की छत से रातभर पहरा देते रहे.
बीच-बीच में छात्रों की ओर से लाउड स्पीकर पर लोगों से अपील की जा रही थी कि वे भी हमले की स्थिति में मस्जिद और मदरसे के साथ खड़े हों और जेहाद में शामिल हों.
हालांकि स्थानीय बीबीसी संवाददाता के मुताबिक सोमवार की सुबह पुलिस घेराबंदी में थोड़ी राहत दी गई और अब आसपास के रास्तों पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है.
टकराव
पाकिस्तान की हुकूमत और लाल मस्जिद के बीच पिछले कुछ महीनों से लगातार गतिरोध जारी है.
इस दौरान कई मसलों पर सरकार और मस्जिद या मदरसे का प्रबंधन आमने-सामने आए हैं पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई सख़्त कार्रवाई नहीं की गई है.
स्थानीय संवाददाता के मुताबिक ऐसा लगता है कि सरकार इसके ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई करने से कतरा रही है.
मिसाल के तौर पर ताज़ा घटना में दो सिपाही पिछले तीन दिनों से मदरसे में जबरन रोक रखे गए हैं पर सरकार ने इन्हें छुड़वाने के लिए अभी तक कोई ठोस क़दम नहीं उठाया है.
ऐसे अन्य मामलों में कठोर कार्रवाइयों को अंजाम देने के लिए चर्चित रहने वाली पाकिस्तान सरकार के आपदा नियंत्रण सेल के अध्यक्ष जावेद इक़बाल चीमा ने तो बीबीसी से बातचीत में यह तक कह डाला कि ऐसे किसी अभियान की ज़रूरत महसूस नहीं हो रही है.
लाल मस्जिद की ओर से कभी इस्लामिक क़ानूनों को कठोरता से लागू करवाने, कभी तालेबानी तौर-तरीके अख्तियार करने तो कभी संगीत, वीडियो की बिक्री के ख़िलाफ़ फ़तवे जारी किए जाते रहे हैं.
मदरसे की छात्राएं भी अपने विरोध-प्रदर्शन के तरीकों और हिंसात्मक रवैये के लिए विवादों में रही हैं.