रविवार, 20 मई, 2007 को 12:38 GMT तक के समाचार
पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा ग्रुप की कार फ़ैक्टरी का विरोध कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प में कम के कम 20 लोग घायल हो गए हैं.
हिंसा उस समय शुरू हुई जब गाँव वालों ने फ़ैक्टरी के एक निर्माणाधीन दीवार को तोड़ने की कोशिश की. पुलिस ने जब ग़ुस्साए लोगों को क़ाबू में करने की कोशिश की तो लोगों ने उन पर ईंट बरसाए.
बाद में पुलिस ने उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियाँ चलाईं. कृषि जोमी रक्षा समिति के सदस्य रविवार को कार फ़ैक्टरी का विरोध करने वहाँ इकट्ठा हुए थे.
उनका नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय विधायक रबींद्र नाथ भट्टाचार्य कर रहे थे. उनके साथ कृषि जोमी रक्षा समिति के संयोजक बेचाराम मन्ना भी मौजूद थे.
बाद में उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन में वे किसान इकट्ठा हुए थे जिन्होंने टाटा की परियोजना के लिए अपनी ज़मीन देने पर सहमति नहीं जताई थी और जिस पर काम पहले ही शुरू हो चुका है.
सर्वदलीय बैठक
सिंगूर के अलावा नंदीग्राम में भी विशेष आर्थिक ज़ोन का विरोध होता रहा है. राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर 24 मई को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है.
रविवार को सिंगूर में हुई हिंसा के बारे में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और विपक्ष के नेता पार्थ चटर्जी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई में कृषि जोमी रक्षा समिति के कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं जिनमें से कई गंभीर रूप से घायल हैं.
उन्होंने बताया कि जिन किसानों ने अपनी ज़मीन नहीं देने का फ़ैसला किया था, उन किसानों की सूची अदालत के अलावा राज्य सरकार और राज्यपाल के पास भेज दी गई है.
टाटा मोटर्स ने इस साल के शुरू में सिंगूर में अपनी फ़ैक्टरी पर काम शुरू किया था. कंपनी ने दावा किया था कि वह यहाँ दुनिया की सबसे सस्ती कार बनाएँगे जिसकी क़ीमत सिर्फ़ एक लाख रुपए होगी.
लेकिन उसकी ये परियोजना उस समय विवादों में पड़ गई जब कुछ किसानों ने यह कहते हुए विरोध करना शुरू किया कि सरकार ने उनकी ज़मीन उनकी इच्छा के ख़िलाफ़ ने ले ली है.
लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि उसने ज़्यादातर प्रभावित किसानों को मुआवज़ा दे दिया है. इस साल कृषि ज़मीन को औद्योगिक कार्यों के लिए हथियाने को लेकर पश्चिम बंगाल में नियमित रूप में विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं. नंदीग्राम में तो विरोध प्रदर्शनों के दौरान 14 लोग मारे भी गए थे.