रविवार, 20 मई, 2007 को 19:45 GMT तक के समाचार
पुलिस का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के करोल बाग इलाक़े से सोने की पॉलिश करनेवाले सौ से अधिक बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ख़बरें मिलीं थीं कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे ऐसी काम कर रहे हैं, उसके बाद वहाँ छापे मारे गए. ख़बर है कि ज्यादातर ये बच्चे पश्चिम बंगाल से हैं.
इस मामले में ऐसी ही एक इकाई के मालिक से पूछताछ की जा रही है. हालांकि उनका कहना था कि बच्चों से जबरदस्ती काम नहीं कराया जा रहा था.
उनका कहना था कि बच्चों के माता पिता ने कमाई के लिए इन बच्चों को स्वेच्छा से भेजा था.
ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने एक क़ानून बनाकर सड़कों के किनारे स्थित दुकानों, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बाल मज़दूरी को ग़ैरकानूनी घोषित कर दिया है.
इस क़ानून के तहत बाल मज़दूरी के दायरे में 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चे शामिल हैं.
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ भारत में लगभग सवा करोड़ बाल मज़दूर हैं लेकिन ग़ैर सरकारी संगठनों के मुताबिक़ यह संख्या छह करोड़ तक हो सकती है.
भारत में ख़तरनाक घोषित किए गए उद्योगों में बाल मज़दूरी पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है.