शनिवार, 19 मई, 2007 को 09:50 GMT तक के समाचार
शुक्रवार को आंध्र प्रदेश की मक्का मस्जिद में विस्फोट के बाद कुछ संगठनों की माँग पर हैदराबाद शहर बंद है. दुकानें नहीं खुली हैं और सड़क पर यातायात लगभग बंद है.
हैदराबाद की मक्का मस्जिद और चारमीनार के इलाक़े को पुलिस ने घेर रखा है. विस्फोट के बाद नाराज़ भीड़ पर पुलिस की गोलीबारी में पाँच लोगों की मौत की पुष्टि होने के बाद लोग बहुत नाराज़ हैं.
शनिवार को जब केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों से मिलने पहुँचे तो नाराज़ लोगों ने उन्हें और मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी को घेर लिया.
लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और नारे लगाए. लोगों ने कहा कि उन्हें राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं रह गया है और विस्फोट की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई से करवाई जानी चाहिए.
बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारुक़ का कहना है कि मुख्यमंत्री ने लोगों को आश्वासन दिया है कि ज़रुरत हुई तो वे इस मामले की जाँच सीबीआई से करवाएँगे.
मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज़ के वक्त हुए विस्फ़ोट में 11 लोग मारे गए और उसके बाद पुलिस फायरिंग में में पाँच लोगों की मौत हो गई थी. इसमें 35 से अधिक लोग घायल हुए थे.
व्यापक बंद
मुस्लिम संगठनों और वामपंथी दलों के आह्वान पर हैदराबाद शहर बंद है. लोगों ने दुकानें नहीं खोली हैं.
सरकारी और निजी बसें बंद हैं और कम ही लोग वाहन लेकर बाहर निकले हैं.
शहर में अभी भी तनाव है और कई इलाक़ों में शुक्रवार की शाम से ही कर्फ़्यू जैसा माहौल है. उधर पुलिस ने स्वीकार कर लिया है कि विस्फोट के बाद भड़की भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई थी.
अधिकारियों का कहना है कि पाँच लोगों की मौत पुलिस की गोली से हुई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पाँच में से चार के सीने पर गोली लगी है.
गृहमंत्री शिवराज पाटिल और मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने एक पत्रवार्ता को संबोधित किया है. शिवराज पाटिल ने कहा कि विस्फोट की साज़िश सामाजिक समरसता को ख़त्म करने के लिए रची जा रही है.
दोनों ही नेताओं ने कहा है कि वे इस समय विस्फोट के लिए किसी का नाम नहीं ले रहे हैं क्योंकि इसकी जाँच जारी है. सीबीआई जाँच के मामले में उनका जवाब गोलमोल ही रहा.
'हिंदू चरमपंथियों का हाथ'
हैदराबाद के सांसद असीदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में नाराज़गी जताते हुए कहा है कि इस विस्फोट के पीछ साफ़ तौर पर हिंदू चरमपंथियों का हाथ दिखता है.
उन्होंने कहा कि विस्फोट ठीक उसी तरह किया गया है जैसा कि मालेगाँव में किया गया था.
उनका कहना था कि मालेगाँव और नांदेड़ की तरह ही विस्फोटक जुम्मे के दिन नमाज़ अदा करने की जगह और फिर दूसरा बाहर निकलने के रास्ते में रखे गए थे, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोग मारे जाएँ.
उनका कहना था कि पुलिस हिंदू चरमपंथियों से ध्यान हटाने के लिए जैश आदि संगठनों का नाम ले रही है.
सांसद ओबैसी ने कहा, "राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता, कल के हादसे के बाद उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया है उससे ज़ाहिर हो जाता है कि पुलिस मुलसमानों से कितनी नफ़रत करती है."