शुक्रवार, 18 मई, 2007 को 13:37 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि वे इस साल चुनाव से पहले पूर्व प्रधानमंत्रियों नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो को पाकिस्तान लौटने नहीं देंगे.
लेकिन बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के बयान को ख़ारिज़ करते हुए कहा है कि ये टिप्पणी 'तबाह हो रहे तानाशाह का प्रलाप' है.
पीपीपी का कहना है कि बेनज़ीर भुट्टो चुनाव से पहले देश ज़रूर लौटेंगी. नवाज़ शरीफ़ को वर्ष 2000 में देश से निर्वासित कर दिया गया था जबकि इसके दो साल बाद बेनज़ीर भुट्टो ने देश छोड़ने का फ़ैसला किया था.
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रवक्ता फ़रहतुल्ला बाबर ने कहा, "जनरल मुशर्रफ़ ख़ुद जाने वाले हैं. राष्ट्रपति के रूप में उनके दिन पूरे हो चुके हैं."
नवाज़ शरीफ़ के नेतृत्व वाले पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने भी कहा है कि वे इस साल पाकिस्तान लौटेंगे. पार्टी के एक प्रवक्ता राजा ज़फ़रुल हक़ ने कहा, "संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जिसके तहत किसी नागरिक को देश में आने से रोका जा सके."
समझौते की चर्चा
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ का बयान ऐसे समय आया है जब ऐसी चर्चा चल रही थी कि वे बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ समझौते की कोशिश में हैं.
जानकारों का कहना है कि कराची में हुई हिंसा के कारण इस समझौते का भविष्य अधर में पड़ गया है. कराची में परवेज़ मुशर्रफ़ समर्थकों और निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के समर्थकों के बीच हुई हिंसा में 41 लोग मारे गए थे.
वैसे राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पहले भी बेनज़ीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ़ के स्वदेश लौटने की बात ठुकरा चुके हैं. एक निजी टीवी चैनल आज के साथ विशेष इंटरव्यू में मुशर्रफ़ ने कहा, "चुनाव के पहले कोई भी स्वदेश नहीं लौट रहा."
वैसे समझौते के बारे में बेनज़ीर भुट्टो पहले कह चुकी हैं कि इस साल के अंत तक राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने का अपना वादा पूरा करना होगा, तभी कोई समझौता हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के बाद से राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को बड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है.