मंगलवार, 22 मई, 2007 को 13:18 GMT तक के समाचार
डेरा सच्चा सौदा एक आध्यात्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1948 में तब के संयुक्त पंजाब और आज के हरियाणा के सिरसा में की गई थी.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस संगठन ने कई धर्मों की सीख और सिद्धांतों से कई बातें अपनाते हुए समाज सेवा और धार्मिक ज्ञान बाँटने का काम किया है.
इस संगठन के अनुयायियों में सिख धर्म के लोग, हिंदू धर्म के अनुयायी, पिछड़े और दलित वर्गों के लोग शामिल हैं.
पर्यवेक्षकों के अनुसार जैसे-जैसे इस संगठन का प्रभाव बढ़ता गया वैसे-वैसे उसके समर्थकों ने समय समय पर कुछ राजनीतिक पार्टियों और नेताओं का समर्थन भी किया है.
चुनाव के दौरान उस इलाक़े में राजनीतिक पार्टी में ये होड़ रहती है कि यदि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों का समर्थन मिल सके तो उसे ज़रूर हासिल किया जाए.
डेरा समर्थकों ने 1998 के संसदीय चुनावों में अकाली दल और इस वर्ष पंजाब विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया था.
शुरुआत
शहंशाह मस्ताना नाम के एक धार्मिक गुरू ने एक झोपड़ी से आध्यात्मिक कार्यक्रमों और सत्संगों का आयोजन करके इसकी शुरुआत की थी. समय के साथ डेरा सच्चा के अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई.
इस संगठन के पास कई राज्यों में ज़मीन है, जिसपर खेती से होने वाली आय से संगठन चलाने के लिए और समाज सेवा के लिए पैसा आता है. एक अनुमान के अनुसार डेरा सच्चा सौदा संगठन के लाखों अनुयायी हैं.
शहंशाह मस्ताना के बाद शाह सतनाम जी को डेरे का गुरू बनाया गया. वर्तमान डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह का जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले के गुरूसर मोदिया में जाट सिख परिवार में हुआ था.
डेरा समर्थकों का कहना है कि डेरा सभी धर्मों का आदर-सम्मान करता है और सभी धर्मों में आस्था रखने वाले लोगों का वहाँ स्वागत है.
पर्यवेक्षक मानते हैं कि शायद यही कारण है कि दलित और पिछड़े वर्ग के अनेक लोग डेरे के उँच-नीच, जात-पात और ग़रीब-अमीर की दरार से ऊपर उठने के वादे से प्रभावित होकर डेरे की ओर खिंचे चले आते रहे हैं.
डेरा के समर्थक इसे 'सच्चा धार्मिक आश्रम' कहते हैं. डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों को माँस इत्यादि खाने और मदिरा का सेवन करने की इजाज़त नहीं होती.
डेरा समाज सेवा में काफ़ी सक्रिय रहा है. रक्तदान शिविर, नेत्र शिविर, देश में कहीं भी बाढ़ आने या फिर सूखा पड़ने पर मदद डेरे की मुख्य गतिविधियों में हैं.
डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने अपने गाँव में वर्ष 1994 में एक अस्पताल का निर्माण करवाया था.
इसके अलावा यहीं पर वर्ष 2004 में लड़कियों के लिए एक स्कूल की स्थापना भी की गई. जहाँ ग़रीब बच्चों को मुफ़्त शिक्षा दी जाती है.
गुरमीत राम रहीम सिंह
डेरा सच्चा सौदा के वर्तमान प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह अपने माँ-बाप की इकलौती संतान हैं. उन्हें सात साल की उम्र में ही 31 मार्च, 1974 को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह जी ने ये नाम दिया था.
23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया और गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया.
बाद में एक औपचारिक कार्यक्रम में सतनाम सिंह ने डेरा की पूरी ज़िम्मेदारी गुरमीत राम रहीम सिंह को सौंप दी.
गुरमीत राम रहीम सिंह ने बहुत से भजन लिखे हैं कई किताबें भी लिखी हैं. उन्होंने समाज सेवा के लिए अनुयायियों को समूहों में बाँट रखा है. एक समूह में तकरीबन 30 गाँव आते हैं.