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शुक्रवार, 18 मई, 2007 को 06:02 GMT तक के समाचार

मुंबई धमाके: पाँच को तीन साल क़ैद

1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार धमाकों में दोषी करार दिए गए 100 अभयुक्तों को सज़ा देने की शुरुआत हो गई है.

टाडा अदालत ने सज़ा सुनाने की शुरुआत करते हुए पाँच दोषी लोगों को तीन-तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाई है और 25-25 हज़ार रुपए का ज़ुर्माना किया है.

ज़ुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हें छह महीने की सज़ा और भुगतनी होगी.

इन सभी लोगों को कस्टम क़ानून के तहत दोषी ठहराया गया है.

उल्लेखनीय है कि 1993 में मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे.

इन धमाकों में 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे. अदालत ने इस मामले में कुल 100 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है जबकि 23 लोगों को बरी कर दिया गया.

इन्हीं अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं.

टाडा अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत तो दोषी ठहराया लेकिन आतंकवाद के आरोपों से बरी कर दिया है.

सज़ा

जिन पाँच लोगों को शुक्रवार को सज़ा सुनाई गई है उन्हें धमाके के लिए उपयोग में लाए गई विस्फोटक सामग्री की तस्करी का आरोप है.

इनमें से तीन लोग रशीद उमर अलवरे, अब्बास दाउद शेखधरे और शाहजहाँ शेखधरे उस बोट के मालिक हैं, जिसका उपयोग तस्करी के लिए किया गया.

इसके अलावा जिन दो लोगों को सज़ा सुनाई गई है वे शरीफ़ अधिकारी और यशवंत गोयनकर हैं और ये दोनों मछुवारे हैं.

अदालत ने इन लोगों की बोट को ज़ब्त करने के भी आदेश दिए हैं.

विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के अनुसार इन पाँचों को कस्टम्स एक्ट की धारा 135 के तहत दोषी पाया गया है.

अदालत ने पाया कि इन लोगों ने विस्फोटक सामग्री को अपनी बोट से ऐसी जगह पहुँचाया जहाँ आमतौर पर सामान नहीं उतारा जाता.

सरकारी वकील के अनुसार अदालत ने उन सभी लोगों को अदालत में आने को कहा था जो ज़मानत पर रिहा किए गए हैं लेकिन बाद में उन्हें वापस जाने को कहा गया.

संजय दत्त को भी आज अदालत में आना था लेकिन वे अस्वस्थ होने की वजह से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे.

सरकारी वकील निकम ने कहा कि सज़ा सुनाने की पूरी प्रक्रिया में आठ से दस दिन का समय लग सकता है.