मंगलवार, 15 मई, 2007 को 22:02 GMT तक के समाचार
सुंदर मुखड़े किसको अच्छे नहीं लगते पर यह तो ऐसे मुखड़े वालों से पूछिए कि इस सुंदरता को बनाए रखने के लिए वे क्या-क्या नहीं करते. मसलन, उबटन, फेस पैक, रख-रखाव.. वगैरह.
पर हम यह बात किसी एक चेहरे की सुंदरता के लिए नहीं कर रहे बल्कि उस सुंदरता का ज़िक्र करने के लिए कर रहे हैं जो 17वीं सदी से दुनियाभर को अपनी ख़ूबसूरती के जादू से प्रभावित करती रही है.
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ताज महल की. इस संगमरमर की ख़ूबसूरत ऐतिहासिक इमारत की सुंदरता को निखारने के लिए अब इसका उबटन करने की तैयारी की जा रही है.
भारतीय अधिकारियों ने बताया कि कभी दूध से ज़्यादा सफ़ेद रहे ताज महल के पीलेपन को कम करने के लिए उसपर निखार लाने वाली ख़ास मिट्टी का लेप लगाया जाएगा.
मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की बनवाई हुई इस सफेद संगमरमर की ऐतिहासिक इमारत का रंग प्रदूषण के कारण पीला पड़ता जा रहा है.
भारतीय संसद के सामने रखी गई एक रिपोर्ट में ताज की सफ़ाई के लिए इसपर निखार लाने वाली मिट्टी का लेप लगाने की सिफ़ारिश की गई है.
आह.. से वाह ताज
ताज की सफाई का यह प्रयास कोई सस्ता सौदा नहीं होगा. इस काम में लगभग एक करोड़ रूपए की लागत आएगी.
ऐसा नहीं है कि एक बार की सफाई से ही ताज के निखार का काम पूरा हो जाएगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि ताज की सफेदी को बनाए रखने के लिए लेप लगाने की प्रक्रिया को दोहराते रहना पड़ेगा.
ग़ौरतलब है कि ताज की रंगत में बढ़ते पीलेपन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जाहिर करते हुए 10 वर्ष पहले एक फ़ैसले में कहा था कि ताज महल के आसपास बने उन सभी कारखानों को या तो हटाया जाए या फिर बंद कर दिया जाए, जिनकी वजह से ताज महल पर बुरा असर पड़ रहा है.
यहाँ तक कि ताजमहल के दो किलोमीटर के दायरे में किसी वाहन के आने-जाने पर भी रोक लगी हुई है और पर्यटक ताज के क़रीब पहुँचने के लिए बैटरी से चलने वाली बसों या घोड़ागाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं.
ताज को साफ़ करने की इस प्रक्रिया में उसपर इस मिट्टी का लेप लगाया जाएगा जो कि पूरी तरह सूखने के बाद धोकर हटा दिया जाएगा.
माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से ताज के संगमरमर की सफेदी लौटेगी. इस प्रक्रिया में दो महीने का वक्त लगेगा.