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मंगलवार, 15 मई, 2007 को 09:47 GMT तक के समाचार

फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में फ़ैसला सुरक्षित

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की मौजूदा जाँच पर संतोष जताते हुए इसकी जाँच सीबीआई से कराने की अपील पर फ़ैसला सुरक्षित रखा है.

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर अगला आदेश गुरुवार को सुनाएगा.

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की जाँच चार से छह हफ़्तों में पूरी कर ली जाएगी.

ग़ौरतलब है कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की जाँच सीबीआई से कराने की अपील की गई थी जिसकी सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि गुजरात सरकार की रिपोर्ट मिलने के बाद इस पर विचार किया जा सकता है.

गुजरात सरकार फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की जाँच से संबंधित गोपनीय रिपोर्ट सोमवार को अदालत को सौंपी चुकी है.

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार के वकील केटीएस तुलसी ने कहा कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में दोषी पाए गए किसी भी व्यक्ति को बख़्शा नहीं जाएगा.

उन्होंने कहा कि गुजरात की अपराध जाँच शाखा यानी सीआईडी सच्चाई को सामने लाने में कामयाब होगी.

फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामला

रिपोर्टों के अनुसार 26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे.

मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपने भाई की लापता पत्नी क़ौसर बी को पेश करने के लिए गुजरात पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया था.

इसके बाद तीन आईपीएस अधिकारियों - डीजी वंज़ारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश कुमार एमएन - को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया था जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं.

बाद में गुजरात पुलिस ने अदालत में स्वीकार किया कि कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन की पत्नी क़ौसर बी की हत्या हो चुकी है और उसके शव को जला दिया गया था.

मामले की जाँच फिलहाल गुजरात की अपराध जाँच शाखा यानी सीआईडी कर रही है.

इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है और संसद के मौजूदा सत्र में भी इस मामले को उठाया गया.