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सोमवार, 14 मई, 2007 को 21:01 GMT तक के समाचार

फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, मध्यप्रदेश

छत्तीसगढ़ में पीयूसीएल उपाध्यक्ष गिरफ़्तार

छत्तीसगढ़ पुलिस ने सोमवार को मानवाधिकार संगठन, पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ यानी पीयूसीएल के उपाध्यक्ष विनायक सेन को गिरफ़्तार कर लिया है.

पुलिस के मुताबिक विनायक सेन पर कथित रूप से नक्सलियों के साथ साठ-गांठ करने और उनके सहायक के रूप में काम करने का आरोप है.

राज्य पुलिस ने उनकी गिरफ़्तारी छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा क़ानून के तहत की है. हालांकि राज्य के कई मानवाधिकार कार्यकर्ता इस विशेष जनसुरक्षा क़ानून को काले क़ानून की संज्ञा देते हैं.

पुलिस महानिदेशक ओपी राठौर ने बताया कि विनायक सेन को बिलासपुर में गिरफ़्तार किया गया.

पुलिस यह भी दावा कर रही है कि पीयूसीएल उपाध्यक्ष रायपुर की जेल में बंद एक माओवादी नेता नारायण सान्याल के पत्रवाहक के रूप में काम करते थे और उनका संबंध नक्सलियों से है.

हालांकि पीयूसीएल की राज्य इकाई के एक पदाधिकारी कहते हैं कि एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में विनायक सेन और नारायण सान्याल की मुलाकातें हमेशा पुलिस की इजाज़त और अधिकारियों की मौजूदगी में हुई थी.

'आरोप निराधार'

कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे में इस बात का कोई संदेह ही नहीं उठता है कि विनायक संदेश लाने और ले जाने का काम करते रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि पिछले माह ही पीयूसीएल ने एक सम्मेलन का आयोजन करके यह माँग की थी कि राज्य के भीतर पुलिस हिरासत में हुई मौतों औऱ मुठभेड़ों में मारे गए लोगों की उच्च स्तरीय जाँच की जानी चाहिए.

उधऱ छत्तीसगढ़ पुलिस ने राज्य मानवाधिकार आयोग के आदेश पर बीजापुर में पुलिस मुठभेड़ के एक मामले की जाँच का काम शुरू कर दिया है.

राज्य सरकार ने वर्ष 2005 में इस विशेष क़ानून को पारित किया था और तब से लेकर अबतक ऐसा पहली बार हुआ है जबकि कोई मानवाधिकार कार्यकर्ता इस क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया हो.

राज्य सरकार के इस क़ानून के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को लंबे समय के लिए अदालत में पेश किए गए ही अपनी हिरासत में रख सकती है.