सोमवार, 14 मई, 2007 को 02:26 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थकों ने हिंसा के बाद देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है.
ग़ौरतलब है कि शनिवार को पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं जिसमें 34 लोग मारे गए थे.
रविवार हिंसा की और घटनाएँ हुईं जिसमें छह और लोग मारे गए. इस तरह हिंसा में अब तक मरनेवालों की संख्या 40 हो गई है.
मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में वकीलों ने सोमवार को इस्लामाबाद में रैली निकालने का फ़ैसला किया है.
यहाँ सोमवार को इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ दायर अपील पर सुनवाई होनी है.
साथ ही कई विपक्षी दलों ने सोमवार को देशव्यापी हड़ताल की अपील की है.
इधर प्रशासन ने पूरे सिंध प्रांत में राजनीतिक रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया है. शहर के पुलिस प्रमुख अज़हर फ़ारूख़ी ने स्थिति को तनावपूर्ण बताया है.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने शनिवार को एक रैली में कहा कि इस ख़ूनखराबे की वजह यह है कि चौधरी के निलंबन के मुद्दे को सियासी बना दिया गया.
उन्होंने लोगों से शांति की अपील की और कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट को फ़ैसला करने दें.
हिंसा की वजह
इफ़्तिख़ार चौधरी शनिवार को कराची में रैली को संबोधित करने वाले थे लेकिन उन्हें हवाई अड्डे पर ही रोक लिया गया और वो रैली को संबोधित नहीं कर सके.
इसके बाद राष्ट्रपति मुशर्रफ़ और निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें शुरू हो गईं जिसमें अनेक लोग मारे गए.
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ की समर्थक मानी जाने वाली पार्टी मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट यानी एमक्यूएम ने अशांति फैलाई. लेकिन एमक्यूएम ने इन आरोपों का खंडन किया है.
इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि विपक्षी दलों ने जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन के मुद्दे को सैन्य शासन के ख़िलाफ़ एक अभियान का रूप दे दिया है.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को अपने अधिकारों का दुरुपयोग करने के आरोप में नौ मार्च को मुख्य न्यायाधीश पद से निलंबित कर दिया था.
उसके बाद से वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन किए हैं.