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रविवार, 13 मई, 2007 को 17:47 GMT तक के समाचार

मारन को मंत्रिमंडल से हटाने का फ़ैसला

तमिलनाडु में डीएमके ने अपने केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन को वापस बुलाने का फ़ैसला किया है.

इसके अलावा उन्हें पार्टी की ओर से एक कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी फ़ैसला किया गया कि क्यों ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया जाए.

उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी अनुशासन का पालन नहीं किया और पार्टी को बदनाम किया.

ख़बर है कि दयानिधि मारन ने अपना इस्तीफ़ा डीएमके प्रमुख करुणानिधि को भेजा दिया है.

संभावना है कि जल्दी ही वे अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को भेज देंगे.

पिछले कुछ दिनों से करुणानिधि और मारन परिवार के बीच चले आ रहे तनाव के बाद यह फ़ैसला लिया गया है.

सर्वेक्षण का विवाद

इस तनाव की शुरुआत मारन परिवार के अख़बार दिनकरण में प्रकाशित एक सर्वेक्षण के बाद हुई थी.

डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री करुणानिधि के उत्तराधिकार को लेकर किए गए एक सर्वेक्षण में कहा गया था कि 70 प्रतिशत लोग करुणानिधि के छोटे बेटे स्तालिन को उनका उत्तराधिकारी मानते हैं और 30 प्रतिशत लोग बड़े बेटे अलेगिरी को.

कहा जाता है कि करुणानिधि ने मारन परिवार से इस तरह का कोई सर्वेक्षण प्रकाशित न करने को कहा था क्योंकि उन्हें अपने उत्तराधिकार की चर्चा पसंद नहीं और वे कोई विवाद भी नहीं चाहते थे.

रविवार को करुणानिधि की अध्यक्षता में हुई डीएमके की बैठक दो घंटे से भी अधिक समय तक चली.

इस बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री दयानिधि मारन को वापस बुलाने का फ़ैसला किया गया.

स्थानीय पत्रकार रशीदा भगत का कहना है कि पार्टी में बहुत दिनों से इस बात पर आपत्ति की जा रही थी कि राजनीतिक वज़न कम होने के बावजूद दयानिधि मारन को बहुत महत्व दिया जा रहा है.

पार्टी के नेताओं को आपत्ति थी कि पार्टी के हर कार्यक्रम में दयानिधि मारन करुणानिधि के बगल में खड़े दिखाई पड़ते हैं.

उनका कहा है कि फ़िलहाल दयानिधि मारन किसी पत्रकार से बात नहीं कर रहे हैं लेकिन अगले 24 घंटों में वे अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को दे सकते हैं.