शनिवार, 12 मई, 2007 को 23:41 GMT तक के समाचार
उत्तर प्रदेश में बसपा का परचम लहराने के एक दिन बाद ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने मायावती को सर्टिफ़िकेट देते हुए कहा है कि वे अकेली ऐसी ग़ैर-भाजपा नेता हैं जो एकजुट हिंदू समाज की मानसिकता को समझती हैं.
आरएसएस के मुखपत्र 'ऑर्गनाइज़र' ने मायावती की तुलना कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की गई है.
आरएसएस का कहना है कि मायावती ने भी इंदिरा गांधी की तरह 'नरम हिंदुत्व' को अपनाया.
कहा गया है कि मायावती ने अपने बहुजन समाज को यह समझाने में सफलता पाई है कि एकजुट हिंदू समाज के साथ जाने में उनका हित जुड़ा हुआ है, न कि कृत्रिम रुप से खड़ी की गई उन सीमाओं में जिसके आधार पर लोगों के मन में एक दूसरे के प्रति शंका पैदा की जाती है.
साप्ताहिक पत्र में कहा गया है कि भाजपा ने अपना पारंपरिक वोट को बसपा के हाथों में सौंप दिया और यह पार्टी की रणनीति की खामी थी.
भाजपा की खिंचाई
'ऑर्गनाइज़र' में कहा गया है कि भारतीय जनता पार्टी की हार के लिए उसका आधे-अधूरे मन से चलाया गया अभियान ज़िम्मेदार है.
इसमें सुषमा स्वराज के उस बयान का भी ज़िक्र किया गया है जिसमें हार के बाद कहा गया था कि राज्य में उनकी पार्टी के लिए हिंदुत्व कोई चुनावी मुद्दा नहीं था.
आरएसएस ने कहा है कि राम मंदिर का मुद्दा हाशिए पर डाल दिया गया. हिंदुत्व के आक्रामक प्रचार से पार्टी को ज़्यादा लाभ मिलता लेकिन भाजपा इससे बचती ही रही.
हालांकि आरएसएस मुखपत्र में भाजपा के उस अभियान की सराहना की गई है जिसमें महंगाई, राष्ट्रीय सुरक्षा और क़ानून व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए गए.
इस लेख में आरएसएस के समर्थन से पार्टी अध्यक्ष बने राजनाथ सिंह पर सीधे कोई आक्षेप करने से बचा गया है.
'ऑर्गनाइज़र' ने कहा है कि इस चुनाव में सबसे बड़ी हार कांग्रेस की हुई है, बावजूद इसके कि पूरे गांधी परिवार ने आक्रामक ढंग से चुनाव प्रचार किया था.
उत्तर प्रदेश में पहली बार हिंसा रहित चुनावों के लिए आरएसएस ने चुनाव आयोग के लिए साधुवाद दिया है.