शनिवार, 12 मई, 2007 को 19:21 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान की संसद ने विदेश मंत्री को बर्खास्त कर दिया क्योंकि वे 52 हज़ार अफ़ग़ान शरणार्थियों को ईरान से वापस भेजे जाने को नहीं रोक सके.
पश्चिमी देशों में पढ़े लिखे डॉ रंगीन दादफ़र-स्पाँटा को संसद के निचले सदन में अविश्वास प्रस्ताव पारित करके उनके पद से हटा दिया गया.
इससे पहले शरणार्थी मामलों के मंत्री उस्ताद अकबर को भी इसी मामले में बर्खास्त कर दिया गया था.
अब राष्ट्रपति दो हफ़्तों के भीतर नए मंत्रियों की नियुक्ति करेंगे और फिर संसद उनको स्वीकार या अस्वीकार करने का प्रस्ताव पारित करेगी.
इस बीच राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने देश के सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि ऐसे किसी मामले में मंत्री को बर्खास्त किया जा सकता है जिससे उसका कोई सीधा ताल्लुक न हो.
राजनीतिक बदला
डॉ दादफ़र के ख़िलाफ़ संसद के निचले सदन वोलेसी-जिरगा में 141 के मुक़ाबले 249 वोट पड़े. इससे पहले उस्ताद अकबर को सिर्फ़ 124 वोट मिले थे.
इन मंत्रियों पर आरोप लगाए गए हैं कि वे 52 हज़ार अफ़ग़ान शरणार्थियों को लेकर ईरान सरकार को मना नहीं सके.
ये सभी शरणार्थी 21 अप्रैल से 8 मई के बीच पूर्वी सीमा से ईरान पहुँचे थे और ईरान सरकार ने इन सभी को अफ़ग़ानिस्तान वापस भेजने का निर्णय लिया था.
ईरान का कहना है कि उसे इस बात का अधिकार है कि वे अवैध रुप से ईरान आए कामगारों को वापस उनके देश भेज दे.
एक अनुमान है कि ईरान में ऐसे लोगों की संख्या 10 लाख से अधिक है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वापस भेजे जा रहे शरणार्थियों की स्थिति अच्छी नहीं है और उनके पास खाना और पानी भी नहीं पहुँच रहा है.
काबुल में बीबीसी संवाददाता अलेस्टेयर लीथेड का कहना है कि यह ठीक है कि बड़ी संख्या में शरणार्थी वापस भेज दिए गए हैं लेकिन यह हर साल होता है और डॉ दादफ़र के विरोधियों ने इस मामले का उपयोग उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए किया है.
उनका कहना है कि मुजाहिदीन कमांडरों को डॉ दादफ़र की माओवादी पृष्ठभूमि पसंद नहीं है.