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शुक्रवार, 11 मई, 2007 को 22:24 GMT तक के समाचार

ताजपोशी से पहले 'ताज का मामला'

ताज कॉरिडोर मामले में मायावती के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाए जाने की अनुमति का मामला अब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर के पास विचाराधीन है.

राज्य में आठ मई को मतदान ख़त्म होने के एक दिन बाद ही मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपनी टिप्पणी के साथ फ़ाइल राज्यपाल के पास भेज दी थी.

आमतौर पर इस तरह से मुक़दमा चलाए जाने की अनुमति राज्यपाल ही दे सकते हैं.

जिस तरह से मायावती जीत कर आई हैं, उसके चलते यह मामला मायावती और राज्यपाल के लिए एक राजनीतिक पहेली साबित हो सकता है.

हालांकि बसपा के एक नेता ने इस कार्रवाई के सवाल पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि मायावती के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद फ़ाइल अप्रासंगिक हो जाएगी.

मामला

उल्लेखनीय है कि ताज कॉरिडोर परियोजना के तहत विश्वप्रसिद्ध ताजमहल को आगरा के किले और आसपास के अन्य स्मारकों से जोड़ना था.

इसके अलावा संरक्षित स्मारक परिसर में एक शॉपिंग कॉम्पलेक्स भी बनना था.

इसके लिए उत्तर प्रदेश ने 175 करोड़ रुपए की योजना बनाई थी. तत्कालीन मायावती सरकार ने सत्रह करोड़ रुपए भी जारी कर दिए थे.

बाद में यह मामला सीबीआई को जाँच के लिए सौंप दिया गया था.

सीबीआई ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के चार अधिकारियों और केंद्र के एक अधिकारी को दोषी पाया है.

मुलायम सिंह सरकार के महाधिवक्ता एसएमए काज़मी ने बीबीसी को बताया कि मुलायम सिंह यादव ने नौ मई को फ़ाइल गवर्नर के पास भेज दी है.

उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस फ़ाइल पर अपनी ओर से कोई सिफ़ारिश नहीं की है.

अब इस पर राज्यपाल को फ़ैसला लेना है.

सीबीआई लखनऊ की उस अदालत के आदेश पर मुक़दमा चलाए जाने की अनुमति माँग रही है, जहाँ इस मामले की सुनवाई चल रही है.

अदालत ने सीबीआई को आदेश दिए हैं कि वह 15 मई तक सरकार से मुक़दमा चलाने की अनुमति हासिल कर ले.

यदि इस मामले में सीबीआई की ओर से मायावती के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल किया जाता है तो उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना कठिन हो सकता है.

इससे पहले आरोप पत्र दाखिल होने के बाद लालू प्रसाद यादव और जयललिता को मुख्यमंत्री पद छोड़कर एक उत्तराधिकारी नियुक्त करना पड़ा था.