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बुधवार, 09 मई, 2007 को 09:25 GMT तक के समाचार

बारबरा प्लैट
बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के पास विकल्प सीमित

पाकिस्तान के निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी को मिल रहे जनसमर्थन के बीच राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास हालात से निपटने के विकल्प सिमटते जा रहे हैं.

इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को पिछले दिनों इस्लामाबाद से लाहौर के सफ़र में मिले समर्थन को विश्लेषक उनकी जीत के रूप में देख रहे हैं.

इस सफ़र में हज़ारों की तादाद में वकीलों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में ज़ोरदार नारेबाजी की.

इफ़्तिख़ार चौधरी के समर्थन में उमड़े जनसैलाब का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस्लामाबाद से लाहौर का 285 किलोमीटर का सफ़र तय करने में उन्हें लगभग 22 घंटे लगे.

ख़ासकर सिंध और नार्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रांत में उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने दो माह पूर्व इफ़्तिख़ार चौधरी को पद के दुरुपयोग के आरोप में मुख्य न्यायाधीश पद से हटा दिया था.

चौधरी ने जनरल की इस कार्रवाई को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया था.

इफ़्तिख़ार चौधरी हालाँकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन उनके समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों से लग रहा है कि इस अभियान ने सैन्य शासन के ख़िलाफ़ मुहिम की शक्ल ले ली है.

विकल्प

इन बदले हालात से निपटने के लिए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के विकल्प भी दिन पर दिन कम होते जा रहे हैं.

मसलन राष्ट्रपति को उम्मीद करनी चाहिए कि प्रदर्शनों की धार धीरे-धीरे कुंद पड़ जाए. लेकिन लाहौर की पिछले दिनों की तस्वीर से फ़िलहाल ऐसा होता नहीं दिखता.

दूसरा, जनरल मुशर्रफ़ मान लें कि उन्हें मुख्य न्यायाधीश को हटाने की ग़लत सलाह दी गई थी और वे इसके लिए किसी को 'बलि का बकरा' बना लें. लेकिन विश्लेषकों का कहना कि इस कद़म के लिए अब बहुत देर हो चुकी है.

तीसरा, वह आपातकाल की घोषणा कर मार्शल लॉ लागू कर सकते हैं. लेकिन इससे सड़कों पर हिंसा का दौर शुरू हो सकता है और साथ ही जनरल को अपने रणनीतिक सहयोगी अमरीका समेत अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से निंदा झेलनी पड़ सकती है.

और चौथा, वह पाकिस्तान की राजनीति के सबसे लोकप्रिय चेहरे बेनज़ीर भुट्टो से हाथ मिला सकते हैं. अटकलें हैं कि इस समझौते के तहत अगर बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) मुशर्रफ़ को फिर से राष्ट्रपति बनाने के लिए समर्थन दे तो भुट्टो के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के मामलों को वापस ले लिया जाएगा और उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति होगी.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने वकीलों को चेताया है कि वे 'विशुद्ध संवैधानिक और न्यायिक मामले' को राजनीतिक लाभ के लिए न भुनाएँ.

उनका कहना है कि वह व्यक्तिगत तौर पर इफ़्तिख़ार चौधरी के ख़िलाफ़ नहीं हैं और इस मामले में कोर्ट जो भी फ़ैसला करेगा, उन्हें मंजूर होगा.

लेकिन प्रदर्शन जितनी देर चलेंगे, मुशर्रफ़ के भविष्य को लेकर सवाल भी उठते रहेंगे.

मुशर्रफ़ चाहते हैं कि न केवल वह राष्ट्रपति के लिए फिर चुनें जाएँ, बल्कि जनरल का ओहदा भी उनके पास ही रहे.