बुधवार, 09 मई, 2007 को 18:25 GMT तक के समाचार
तमिलनाडु के 'दिनाकरन' अख़बार के मदुरै स्थित दफ़्तर पर कथित द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समर्थकों के हमले के कारण तीन कर्मचारियों की मौत हो गई.
माना जा रहा है कि अख़बार पर यह हमला करुणानिधि के बेटों की आपसी प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है.
आरोप है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि के बड़े बेटे एम के अषागिरी के समर्थकों ने अख़बार के दफ़्तर पर हमला किया और उसमें आग लगा दी जिससे अख़बार के तीन कर्मचारियों की मौत हो गई.
समर्थक अख़बार में मुख्यमंत्री और द्रमुक नेता करुणानिधि का उत्तराधिकारी कौन होगा, इस संबंध में छपे एक सर्वेक्षण का विरोध कर रहे थे.
पुलिस का कहना है कि हिंसा के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से 25 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
दरअसल अख़बार ने एसी नील्सन के साथ मिलकर एक सर्वेक्षण ‘लोग क्या सोचते हैं’ छापा था.
इसमें बताया गया था कि 70 फ़ीसदी लोग करुणानिधि के छोटे बेटे एम के स्तालिन को उत्तराधिकारी बनाए जाने के पक्ष में हैं जबकि केवल दो फ़ीसदी बड़े बेटे अषागिरी के पक्ष में हैं.
अषागिरी राज्य के दक्षिणी ज़िलों में पार्टी का कामकाज देखते हैं.
मारन भी रिश्तेदार
दिलचस्प तथ्य है कि इस अख़बार के मालिक मुख्यमंत्री करुणानिधि के रिश्तेदार कलानिधि मारन हैं. वे केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन के भाई भी हैं.
इस सर्वेक्षण में दयानिधि मारन को राज्य के एक अन्य केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदॉस से बेहतर बताया गया है.
ग़ौरतलब है कि मारन द्रमुक से हैं जबकि रामदॉस पीएमके से हैं. जानकारों के अनुसार इससे दोनों दलों में कड़ुवाहट और बढ़ गई है.
चेन्नई में राजस्थान पत्रिका के प्रमुख संवाददाता मयंक शुक्ला ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि यह उत्तराधिकारी की लड़ाई है जिसकी शुरुआत पिछले विधानसभा चुनावों से हो गई थी.
उनका कहना है कि तमिलनाडु के दक्षिणी इलाक़ों में अषागिरी का प्रभाव अच्छा है जबकि बाकी हिस्सों में उनके भाई स्तालिन का असर अधिक है.
इस घटना की मुख्यमंत्री करुणानिधि ने आलोचना की है, साथ ही उन्होंने राज्य विधानसभा में अपने 50 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में 11 मई को आयोजित होने वाले समारोह को स्थगित करने का प्रस्ताव किया है.