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मंगलवार, 08 मई, 2007 को 13:01 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर से

शिल्पकारों की नज़र सियायत पर

अपनी प्रतिमाओं की वजह से प्रसिद्ध जयपुर के मूर्ति बाज़ार का सियासत से कोई सरोकार नहीं है.

लेकिन मूर्ति बाज़ार की नज़रें भी उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों पर लगीं हैं क्योंकि लखनऊ में मायावती की ताजपोशी हुई तो वहाँ अंबेडकर प्रतिमाओं की माँग बढ़ जाएगी.

सदियों से जयपुर देवी-देवताओं और महापुरुषों की सुंदर मूर्तियां बनाने का केंद्र रहा है. लेकिन इस समय शिल्पकार पत्थर तराशकर अंबेडकर की मूर्तियां बनाने में लगे हुए हैं.

उन्हें लगता है कि अगर उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो अंबेडकर प्रतिमाओं की मांग बढ़ जाएगी.

भीतरी जयपुर में ख़जाने वालों का रास्ता जैसे कई क्षेत्र हैं जहाँ शिल्प कार्यशाला और प्रतिमा प्रतिष्ठानों की भरमार है.

इन्हीं में से एक जैमिनी मूर्ति केंद्र के मुकेश जैमिनी कहते हैं, "दलितों में आई राजनीतिक चेतना के बाद से अंबेडकर मूर्तियों की मांग में यकायक बढ़ोत्तरी हुई है."

मुकेश जैमिनी को मूर्ति कला विरासत में मिली है.

वे कहते हैं, "अंबेडकर के साथ गौतम बुद्ध और शाहू जी महाराज की मूर्तियों की मांग भी है. साथ ही हाथी प्रतिमाओं की मांग भी पैदा हो रही है. मायावती जब भी उद्यान बनवाती हैं तो हाथी द्वार पर स्वागत करते मिलते हैं."

मांग

जयपुर के एक शिल्प व्यवसायी नवीन जोशी बताते हैं, "महात्मा गांधी की मांग सदाबहार है. बाक़ी महापुरुषों की मांग सत्ता के साथ बदलती रहती है."

हरियाणा में जब ओम प्रकाश चौटाला सत्ता में थे तो हरियाणा से देवी लाल की प्रतिमाओं की मांग आने लगी.

शिल्पकारों के अनुसार उन्हें महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से भी अंबेडकर प्रतिमाओं की मांग आती रहती है.

दलित अधिकार कार्यकर्ता पीएल मीमरोठ कहते हैं,"अभी अंबेडकर प्रतिमाओं की मांग और बढ़ेगी क्योंकि अंबेडकर ने दलितों का स्वाभिमान बढ़ाया है. वे मंदिर से वंचित हैं. ऐसे में अंबेडकर प्रतिमा उन्हें संतोष देती है. इसलिए पूरे भारत में बाबा साहब की मूर्तियों की मांग बढ़ रही है."

समाजशास्त्री डॉ राजीव गुप्ता कहते हैं कि दक्षिणपंथी दल कभी समझते थे कि अंबेडकर उनके वोटों में कमी करते हैं. अब वे भी वोटों की ख़ातिर अंबेडकर का यशोगान करने लगे हैं. अंबेडकर ऐसे दलों की ज़रूरत हो गए हैं. इसलिए मांग बढ़ रही है.

जयपुर में बनी प्रतिमाएं श्रीलंका और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में जाती रही हैं. जयपुर में मूर्तिकला सदियों पुरानी परंपरा है. राजा मान सिंह ने इसे प्रोत्साहित किया. आज ये एक बड़ा उद्योग बन गया है.

मूर्तियों की इस मंडी में मूर्तियों की मांग राजनेताओं की बनती-बिगड़ती हैसियत से तय होती है लेकिन राजनीति तो अब ख़ुद एक मंडी हो गई है.