सोमवार, 07 मई, 2007 को 12:11 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित किए गए मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिखा़र चौधरी के ख़िलाफ़ चल रही जाँच को स्थगित करने का आदेश दिया है.
इफ़्तिख़ार चौधरी के ख़िलाफ़ पद के दुरुपयोग के आरोप हैं. कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि उनके मामले की सुनवाई स्वंय सुप्रीम कोर्ट करेगी.
बीबीसी के कराची संवाददाता सईद शोएब हसन ने कहा है कि ये फ़ैसला इफ़्तिख़ार चौधरी की जीत के तौर पर देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को मुख्य न्यायाधीश पद से बर्ख़ास्त कर दिया था और उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की जाँच के लिए एक न्यायिक परिषद का गठन किया था.
लेकिन इफ़्तिख़ार चौधरी ने दलील दी थी कि न्यायिक परिषद उनके मामले की सुनवाई निष्पक्षता से नहीं करेगा.
सर्वोच्च न्यायिक परिषद जजों के आचरण पर नज़र रखने वाली संस्था है.
संवाददाता के मुताबिक निलंबित किए गए मुख्य न्यायाधीश का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों वाली खंडपीठ में उनके मामले की निष्पक्ष सुनवाई हो सकेगी.
लाहौर में रैली
इससे पहले इफ़्तिख़ार चौधरी ने रविवार को लाहौर में एक बड़ी रैली को संबोधित किया था जिसमें हज़ारों की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.
रैली में बोलते हुए इफ़्तिख़ार चौधरी ने कहा था कि जो तानाशाह क़ानून को नज़रअंदाज़ करते हैं, वे 'तबाह' हो जाते हैं.
इफ़्तिख़ार चौधरी ने सीधे-सीधे तौर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का नाम नहीं लिया.
उनका कहना था, "संविधान के बजाय जिस देश की बुनियाद तानाशाही पर बनती है, वहाँ न क़ानून का पालन होता है और मूल अधिकारों की भी रक्षा नहीं होती. जो देश अपने अतीत से सबक नहीं लेते और ग़लतियाँ दोहराते हैं, उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ती है."
मुख्य न्यायाधीश के निलंबन के फ़ैसले का पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध हुआ है. वकीलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने कई जगह विरोध प्रदर्शन भी किया है.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक इफ़्तिख़ार चौधरी न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं लेकिन उनके समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों ने सैन्य शासन के ख़िलाफ़ मुहिम की शक्ल ले ली है.
लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इफ़्तिख़ार चौधरी को अपना समर्थन दिया है. लाहौर में कई जगहों पर राजनीतिक दलों ने अपने कैंप लगाए हैं जहाँ इफ़्तिख़ार चौधरी रुक रहे हैं और लोगों से बात कर रहे हैं.