सोमवार, 07 मई, 2007 को 06:54 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने चर्चित तंदूर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए सुशील शर्मा की मौत की सज़ा पर रोक लगा दी है. अब मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ करेगी.
पूर्व कांग्रेस नेता सुशील शर्मा को अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करने और फिर उनका शव तंदूर में जलाने का दोषी पाते हुए दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था.
इसके बाद सुशील शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इस पर सुनवाई करते हुए सोमवार को न्यायाधीश एसबी सिन्हा और न्यायमूर्ति मार्कंडे काट्जू की खंडपीठ ने मौत की सज़ा पर रोक लगा दी और इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ के हवाले कर दिया.
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश आरएस सोढ़ी और पीके भसीन की खंडपीठ ने मौत की सज़ा बरकरार रखते हुए अपने फ़ैसले में नैना साहनी की हत्या को 'दुष्टता की कार्रवाई' बताया था और सज़ा के ख़िलाफ़ सुशील शर्मा की याचिका ख़ारिज कर दी थी.
अदालत ने कहा था कि ये बात ग़लत है कि सुशील शर्मा को निष्पक्ष न्याय नहीं मिला.
नवंबर 2003 में दिल्ली की एक अदालत ने सुशील शर्मा को मौत की सज़ा सुनाई दी.
तंदूर कांड
इस मामले में दाख़िल किए गए आरोप-पत्र के अनुसार सुशील शर्मा ने अवैध संबंधों के शक में नैना साहनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
फिर शव के कई टुकड़े करके उन्हें दिल्ली के एक रेस्तराँ के तंदूर में झोंक दिया गया था. तंदूर से उठते धुएँ और मानव शरीर के जलने की गंध ने वहाँ से गुज़र रहे एक पुलिस कांस्टेबल का ध्यान खींचा था.
उसके बाद पुलिस ने छापा मार कर तंदूर से नैना साहनी के शव के अधजले हिस्से बरामद किए थे.
रेस्तरां के मैनेजर केशव कुमार को मौक़े पर ही गिरफ़्तार कर लिया गया था.
सुशील शर्मा को घटना के कई दिन बाद बंगलौर में गिरफ़्तार किया गया था. अदालत ने केशव कुमार को सात साल की सज़ा सुनाई थी.