गुरुवार, 03 मई, 2007 को 14:15 GMT तक के समाचार
'फ़र्ज़ी मुठभेड़' मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद गुजरात सीआईडी ने अचानक तेज़ी दिखाते हुए आठ और पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार किया है.
इससे पहले तीन आईपीएस अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया था. अब जिन लोगो को गिरफ़्तार किया गया है, वे छोटे अधिकारी और कर्मचारी हैं.
बारह पुलिसकर्मी फ़रार बताए गए हैं. इसके अलावा गुजरात सीआईडी की एक टीम पूछताछ के लिए आँध्र प्रदेश भी जा रही है.
उल्लेखनीय है कि गुरुवार की सुबह ही सुप्रीम कोर्ट ने 'फ़र्ज़ी मुठभेड़' मामले में गुजरात पुलिस को दो हफ़्ते में अंतिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा है कि इस रिपोर्ट के आने के बाद ही मामले की सीबीआई जाँच करवाने की ज़रूरत पर विचार किया जा सकता है.
26 नवंबर, 2005 को गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि उनके आतंकवाद निरोधी दस्ते और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में सोहराबुद्दीन नाम के एक व्यक्ति को मार दिया गया था जो कि एक चरमपंथी था और उसके चरमपंथी संगठनों से ताल्लुक थे.
बाद में गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी स्वीकार कर लिया था कि सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की भी हत्या हो गई है.
गिरफ़्तारियाँ
ख़बर है कि गुजरात सीआईडी ने गुरुवार को कुल आठ पुलिस कर्मियों को गिरफ़्तार किया है.
इसमें एक राजस्थान के इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान हैं और शेष आठ गुजरात के कांस्टेबल हैं. सीआईडी 12 और पुलिसकर्मियों की तलाश कर रही है और वे फ़रार बताए गए हैं.
सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि गुजरात सीआईडी की एक टीम आँध्रप्रदेश भी जा रही है जो वहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ़) के अधिकारी राधाकृष्णन से पूछताछ करेगी.
राधाकृष्णन गुजरात में डीआईजी रह चुके हैं और एक समय वे गाँधीनगर में पुलिस अधीक्षक भी थे.
अधिकारियों का कहना है कि उनसे पूछताछ की जाएगी कि गुजरात पुलिस ने आँध्र प्रदेश जाकर उनसे किस तरह की सहायता ली थी.
गवाह की तलाश
जाँच अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब तक सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर-बी का कोई अवशेष अब तक फ़ोरेंसिक विशेषज्ञों को नहीं मिला है.
यह साबित करने के लिए कि उनकी हत्या हो चुकी है, इसकी बहुत ज़रुरत होगी.
इस बीच विकल्प के रुप में जाँच अधिकारी यह भी कोशिश कर रहे हैं कुछ पुलिस कर्मचारी ही गवाह बन जाएँ.
अधिकारियों का कहना है कि अब तक दो लोग सरकारी गवाह बनने को तैयार हो गए हैं. इनमें आईपीएस अधिकारी पांडियन के निजी सचिव हैं और एक कांस्टेबल हैं.
जाँच अधिकारियों का कहना है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि ये गवाह बाद में मुकर न जाएँ कुछ और लोगों को सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार किया जा रहा है.
स्थानीय पत्रकार अजय उमठ का कहना है कि चालीस दिनों तक ख़ामोश बैठी गुजरात की जाँच एजेंसी अचानक सक्रिय हो गई है क्योंकि मामले को सीबीआई के पास जाने से बचाने के लिए ज़रुरी है कि 14 दिनों में सभी आवश्यक जाँच पूरी कर ली जाए.