मंगलवार, 01 मई, 2007 को 09:01 GMT तक के समाचार
गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख की 'फ़र्ज़ी मुठभेड़' में मौत के मामले में गिरफ़्तार तीन आईपीएस अधिकारियों की हिरासत अवधि पाँच मई तक बढ़ा दी गई है.
गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि उनके आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में 26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन मारे गए थे.
पुलिस की इस कार्रवाई को फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताते हुए सोराबुद्दीन के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय की फरियाद की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जाँच के निर्देश दिए और राज्य के सीआईडी विभाग ने अपनी जाँच में पुलिस के पक्ष में कई खामियाँ बताई थीं.
इसके बाद डीजी वंजारा (उपमहानिरीक्षक, सीमा क्षेत्र, गुजरात), राजकुमार पांडियन (पुलिस अधीक्षक, इंटेलिजेंस ब्यूरो) और दिनेश एमएन (पुलिस अधीक्षक, अलवर, राजस्थान) को गिरफ़्तार किया गया था.
इन पुलिस अधिकारियों को मंगलवार को अहमदाबाद के मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट केजे उपाध्याय की अदालत में पेश किया गया.
अदालत ने पहले से ही पुलिस हिरासत में चल रहे तीनों अभियुक्तों को चार दिन और पुलिस हिरासत में रखे जाने का आदेश दिया.
कौसर बी मामले की सुनवाई
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की कथित हत्या के मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी.
न्यायाधीश तरुण चटर्जी और न्यायाधीश पीके बालासुब्रमण्यम की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी.
इसी पीठ ने शुक्रवार को गुजरात सरकार को कौसर बी को कोर्ट में पेश करने अथवा उनके बारे में जानकारी देने का आदेश दिया था.
सोमवार को गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि कौसर बी जिंदा नहीं है और हत्या के बाद उनके शव को जला दिया गया था.
मंगलवार को जब अहमदाबाद में अभियुक्तों को पेश किया गया तब अदालत परिसर के बाहर मौजूद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कुछ कार्यकर्ताओं ने वंजारा के समर्थन में नारे लगाए.