सोमवार, 30 अप्रैल, 2007 को 08:44 GMT तक के समाचार
गुजरात सरकार ने माना है कि कथित फ़र्जी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन की पत्नी क़ौसर बी की हत्या हो चुकी है और उसके शव को जला दिया गया था.
गुजरात सरकार ने पिछले हफ़्ते क़ौसर बी की हत्या की आशंका जताई थी और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर कर इसकी पुष्टि कर दी.
क़ौसर बी की हत्या का खुलासा गुजरात सरकार के वकील केटीएस तुलसी और हेमंतिका वाही ने किया.
वकीलों ने इस प्रकरण में कार्रवाई रिपोर्ट भी बंद लिफाफे में न्यायाधीश तरुण चटर्जी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ को सौंपी.
गुजरात सरकार ने अदालत से कहा कि क़ौसर बी के अवशेषों को ढूँढा जा रहा है.
सोहराबुद्दीन 26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए थे.
तब पुलिस ने कहा था उनके संबंध चरमपंथियों से थे. लेकिन बाद में गुजरात सरकार की जाँच में पुलिस के दावा गलत साबित हुआ और इसी माह तीन आईपीएस अधिकारियों को इस मामले में गिरफ़्तार कर लिया गया.
कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर वह मंगलवार को उचित आदेश पारित करेगा.
सीबीआई जाँच की माँग
सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने अदालत में याचिका दायर कर कथित फ़र्जी मुठभेड़ की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने और कौसर बी को पेश करने के लिए गुजरात सरकार को निर्देश देने की माँग की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया था कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी को अदालत में पेश किया जाए लेकिन गुजरात सरकार ऐसा करने में नाकाम रही.
इस फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के तीन अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया था.
इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि गुजरात में फ़र्जी मुठभेड़ मामले की जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए.
भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने सुप्रीम कोर्ट को गुरुवार को सुझाव दिया था कि गुजरात में फ़र्जी मुठभेड़ मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए.
सीआईडी ने इस मामले में गुजरात सीमा क्षेत्र के उपमहानिरीक्षक डीजी वंजारा, गुप्तचर एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात पुलिस अधीक्षक राजकुमार पांड्यन, राजस्थान पुलिस के दिनेश कुमार एमएन को 24 अप्रैल को गिरफ़्तार किया था. बाद में निचली अदालत ने तीनों को एक मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया था.