रविवार, 29 अप्रैल, 2007 को 18:52 GMT तक के समाचार
कांग्रेस प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया है कि नोएडा प्राधिकरण के भूखंड आवंटन में गड़बड़ी की गई जबकि समाजवादी पार्टी ने इसे कोरा झूठ बताया है.
सिब्बल ने रविवार को एक सूची जारी की जिसमें कथित तौर पर नोएडा प्राधिकरण से जिन लोगों को भूखंड देने का फ़ैसला किया गया था उनके नामों की सूची है.
उन्होंने आरोप लगाया कि भूखंडों के आवंटन में सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीशों और नौकरशाहों फायदा पहुँचाया गया और इसके लिए समाजवादी पार्टी (सपा) ज़िम्मेदार है.
सिब्बल ने बीबीसी से कहा, "पुख़्ता सबूत तो यही है कि इस सूची में भूखंड पाने वाले लोगों के पते, बैंक ख़ाते और कई जानकारियाँ दी गई हैं. यह कोई हमारी सूची तो है नहीं. ये तो नोएडा प्राधिकरण की सूची है."
उन्होंने कहा, "इस सूची में न्यायपालिका के लोगों के नाम हैं, कई नौकरशाहों के नाम हैं. कुछ पत्रकारों के भी नाम हैं."
कांग्रेस नेता से बीबीसी ने जब ये पूछा कि चुनाव के समय सूची जारी करने का क्या मतलब है, तो उनका कहना था, "हम जनता को बताना चाहते हैं कि क्या हुआ. अगर चुनाव के समय ये मसला नहीं उठाएँगे तो कब उठाएँगे."
सपा का पलटवार
दूसरी ओर सपा नेता अमर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा सिब्बल के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया.
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री मुलायम सिंह पहले ही इस आवंटन को रद्द कर चुके हैं और न्यायिक जाँच का आदेश दे चुके हैं. जब किसी को फ़ायदा पहुँचा ही नहीं तो मुद्दा क्या है."
अमर सिंह का कहना था, "नोएडा प्राधिकरण एक स्वायत्त संस्था है इसे कामकाज में आज़ादी मिली हुई है. इसके बावजूद जब मुख्यमंत्री को लगा कि कुछ गड़बड़ी हो सकती है तो उन्होंने तुरंत आवंटन रद्द कर दिए."
उनका ये भी कहना था कि भूखंड आवंटन लॉटरी के ज़रिए के होते हैं और इसमें किसी का भी नाम आ सकता है, चाहे वो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के परिजन हों या कोई और आदमी.
अमर सिंह कहते हैं, "ऐसा कोई नियम नहीं है कि न्यायाधीश के परिजन कोई व्यवसाय नहीं कर सकते या लॉटरी के टिकट नहीं खरीद सकते."