शनिवार, 28 अप्रैल, 2007 को 14:33 GMT तक के समाचार
गुजरात में फ़र्जी मुठभेड़ में एक व्यक्ति सोहराबुद्दीन को मारे जाने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया है कि सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी को अदालत में पेश नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया था कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी को अदालत में पेश किया जाए लेकिन गुजरात सरकार ऐसा करने में नाकाम रही है.
गुजरात सरकार के वकील केटीएस तुलसी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार कौसर बी को अदालत में नहीं पेश कर सकती.
तुलसी ने कहा कि ऐसा लगता है कि कौसर बी अब जीवित नहीं हैं.
नवंबर 2005 में उस फ़र्ज़ी मुठभेड़ के बाद से ही कौसर बी लापता बताई गई हैं.
सोहराबुद्दीन के भाई ने अदालत में याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि वो कौसर बी को पेश करने के लिए गुजरात सरकार को निर्देश दे.
गुजरात सरकार के वकील केटीएस तुलसी ने अदालत से कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सोहराबुद्दीन की पत्नी अब शायद जीवित नहीं हों.
इस पर न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वो गुजरात सरकार से इस बारे में रिपोर्ट हासिल करेगी कि क्या वह कौसर बी को अदालत में पेश कर सकती है और उसके बाद सोमवार को इस मामले में कोई फ़ैसला सुनाएगी.
इस फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के तीन अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया था.
सीबीआई जाँच की माँग
इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि गुजरात में फ़र्जी मुठभेड़ मामले की जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए.
भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने सुप्रीम कोर्ट को गुरुवार को सुझाव दिया कि गुजरात में फ़र्जी मुठभेड़ मामले की जाँच का काम केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दिया जाना चाहिए.
सीआईडी ने इस मामले में गुजरात सीमा क्षेत्र के उपमहानिरीक्षक डीजी वंजारा, गुप्तचर एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात पुलिस अधीक्षक राजकुमार पांड्यन, राजस्थान पुलिस के दिनेश कुमार एमएन को गत मंगलवार को गिरफ़्तार किया और तीनों अधिकारियों को एक मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.