गुरुवार, 26 अप्रैल, 2007 को 21:17 GMT तक के समाचार
भारत में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाया है कि गुजरात में सामने आए फ़र्जी मुठभेड़ मामले की जाँच सीबीआई से कराई जानी चाहिए.
भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि गुजरात में कथित फ़र्जी मुठभेड़ मामले की जाँच का काम केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंप दिया जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि गुजरात में एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ के मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के तीन अधिकारियों को मंगलवार को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
इसके बाद बुधवार को इन तीनों अधिकारियों को एक मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था.
गुजरात सीमा क्षेत्र के उपमहानिरीक्षक डीजी वंजारा, गुप्तचर एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो में तैनात पुलिस अधीक्षक राजकुमार पांड्यन, राजस्थान पुलिस के दिनेश कुमार एमएन को सीआईडी ने मंगलवार को गिरफ़्तार किया था.
तीनों अभियुक्तों को सोराबुद्दीन शेख की हत्या के आरोप में मंगलवार को गिरफ़्तार किया गया था.
सोराबुद्दीन कथित तौर पर 26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए थे. उस समय वंजारा एटीएस के प्रमुख थे और पांड्यन उनके नायब थे.
सीबीआई जाँच
इस मामले में दायर एक अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर गोपाल सुब्रमण्यम से कहा था कि वो इस बारे में जाँच करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें.
अपनी जाँच रिपोर्ट में सुब्रमण्यम ने मामले की जाँच सीबीआई के एक विशेष दल से करवाने का सुझाव दिया है.
उधर एटीएस की दलील थी कि सोराबुद्दीन का संबंध चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा से था और उसे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से गुजरात भेजा गया था.
पुलिस की इस कार्रवाई को फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताते हुए सोराबुद्दीन के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय की फरियाद की थी.
इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीआईडी को इसकी जाँच के निर्देश दिए थे.