मंगलवार, 24 अप्रैल, 2007 को 19:19 GMT तक के समाचार
भारत प्रशासित राज्य जम्मू कश्मीर की समस्याओं को सुलझाने के लिए केंद्रीय सरकार के तीसरे गोलमेज़ सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दो समितियों के गठन की घोषणा की है.
ये दोनों समितियाँ जम्मू कश्मीर पर गठित चार कार्यसमूहों की सिफ़ारिशों पर तेज़ी से अमल और विभिन्न कार्यों के बीच तालमेल करेंगी.
एक स्थाई समिति होगी जो सिफ़ारिशों पर तेज़ी से अमल में लाने का काम करेगी और दूसरी निगरानी समिति होगी जो कार्यों के बीच तालमेल पर नज़र रखेगी.
दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास पर हुए इस सम्मेलन में भारत प्रशासित कश्मीर की डेमोक्रैटिक लिबरेशन पार्टी, नेशनल कॉंफ़्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी और लद्दाख हिल डेवलपमेंट काउंसिल के प्रतिनिधियों ने तो भाग लिया.
लेकिन अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के उदारवादी और कट्टरपंथी दोनों धड़ों ने गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया.
पाकिस्तान
कोई दस घंटे चले इस गोलमेज़ सम्मेलन के अंत में दिए गए अपने भाषण में मनमोहन सिंह ने कहा कि बैठक में जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सुझावों का भी ज़िक्र हुआ.
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधारने के लिए विभिन्न स्तरों पर बात हो रही है और सभी सुझावों पर इस गोलमेज़ सम्मेलनों में गंभीरता से विचार हो रहा है.
लेकिन उनका कहना था, "पाकिस्तान की ओर से कुछ सार्वजनिक बयान ऐसे आए हैं जो भारत की छवि को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं करते."
उन्होंने बिना ज़्यादा विवरण दिए कहा, "हम पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मसलों पर गंभीरता से कार्य कर रहे हैं और उनके हल से पूरे क्षेत्र को फ़ायदा होगा."
कार्यसमूहों की सिफ़ारिशें
प्रधानमंत्री ने कहा कि सम्मेलन में चारों कार्यसमूहों की सिफ़ारिशों पर विचार किया गया.
उनका कहना था कि इसके अलावा कुछ अन्य मुद्दे भी उठाए गए जिनमें लद्दाख का मुद्दा भी था और कश्मीरी पंडितों सहित अन्य विस्थापितों का भी और वे आश्वस्त हैं कि कार्यसमूहों की सिफ़ारिशें लागू होने से कई समस्याओं का हल निकलेगा.
प्रधानमंत्री ने माना कि जम्मू कश्मीर में मानवाधिकार हनन की समस्या है.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों से इस बारे में चर्चा चल रही है कि वे अपना कार्य इस तरह से करें कि मानवाधिकार हनन की घटनाओं को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सके.
तीसरे गोलमेज़ सम्मेलन को सफल बताते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर के मसले पर सभी पक्षों के बीच हो रही यह सबसे पारदर्शी बातचीत है.
उन्होंने कहा कि इस तरह की बातचीत जारी रखनी चाहिए और इसी से हल निकलेगा.