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मंगलवार, 24 अप्रैल, 2007 को 23:23 GMT तक के समाचार

विज्ञापन को लेकर नैटो की निंदा

अफ़ग़ानिस्तान में एक रेडियो विज्ञापन को लेकर नैटो सेनाओं की निंदा हो रही है.

इस विज्ञापन के लिए नैटो ने पैसे दिए हैं और इससे संदेश जाता है कि किसानों के लिए अफ़ीम की खेती करना ठीक है.

ख़तरनाक नशीला पदार्थ हेरोइन अफ़ीम से ही बनता है और माना जा रहा है कि इस साल फिर से अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम का रिकॉर्ड उत्पादन होने जा रहा है.

इस विज्ञापन की संयुक्त राष्ट्र और अफ़ग़ानिस्तान सरकार दोनों ने निंदा की है.

संयुक्त राष्ट्र ने पिछले ही महीने कहा है कि हालांकि उत्तरी और मध्य अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम के उत्पादन में कमी आई है लेकिन दक्षिणी हिस्से में इसका उत्पादन बहुत बढ़ा है.

विवादित विज्ञापन

यह विवादित विज्ञापन आया है हेलमंद प्रांत के एक स्थानीय रेडियो स्टेशन पर. और इसके लिए नैटो सेनाओं ने पैसे दिए हैं.

इस विज्ञापन से लगता है मानों अफ़ीम की खेती करना अवैध नहीं है बल्कि ठीक है.

इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सेनाओं को समझ में आता है कि चूंकि अफ़ग़ानियों के पास आय का कोई और साधन नहीं है इसलिए उन्हें अफ़ीम की खेती को नष्ट करने की बजाय सुरक्षा व्यवस्था क़ायम करना चाहिए और विदेशी चरमपंथियों को मारना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि यूरोप में पहुँचने वाली ज़्यादातर हेरोइन अफ़ग़ानिस्तान से ही जाती है.

तालेबान सरकार के पतन के बाद से वहाँ अफ़ीम की खेती को ख़त्म करना एक प्राथमिकता रही है.

लेकिन सेना ने इस अभियान से अपने आपको अलग करते हुए कहा है कि यदि किसानों से उनकी आय का साधन छीन लिया जाएगा तो वे ज़्यादा संख्या में तालेबान की सेना में शामिल हो जाएँगे.

संयुक्त राष्ट्र के नशीली दवा और अपराध विभाग की प्रतिनिधि क्रिस्टीना ओगज़ का कहना है कि इससे किसानों को अलग तरह का संदेश जा रहा है.

उन्होंने कहा, "यह भ्रमित करने वाला संदेश है. नशीली दवाओं के व्यापार और विद्रोही गतिविधियों के बीच गहरा संबंध है."

अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने इस विज्ञापन की जानकारी से इनकार किया है.

दूसरी ओर नैटो ने इस विज्ञापन को रेडियो पर चलवाने के लिए खेद जताया है. लेकिन प्रवक्ता ने कहा है कि सेना का काम सुरक्षा व्यवस्था है और अफ़ीम की खेती रुकवाना सरकार का काम है.