सोमवार, 23 अप्रैल, 2007 को 18:16 GMT तक के समाचार
सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, राँची से
स्कूली पाठ्यक्रम में यौन शिक्षा को शामिल करना सरकार के लिए एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है और उसे लोगों के विरोध-गुस्से का सामना करना पड़ रहा है.
चाहे वो बाबा रामदेव हों, हिंदू संगठन या इस्लामिक संगठन, सभी ने एक सुर में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के इस फैसले पर अपनी आपत्ति जाहिर की है.
झारखंड की राजधानी राँची में तो मुस्लिम युवाओं ने सड़कों पर उतरकर अपने गुस्से का इज़हार किया और पाठ्यक्रम से यौन शिक्षा को हटाने की माँग की.
स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों मुस्लिम युवकों ने राँची में ज़ोरदार प्रदर्शन किया.
इस मौके पर एक विशाल जुलूस निकाला गया जिसके माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने पाठ्यक्रम से यौन शिक्षा को अविलंब हटाने की माँग की.
"हमें नैतिकता चाहिए, अनैतिकता नहीं"- और "सेक्स एजुकेशन वापस लो"- जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने राजभवन तक रैली निकाली जहाँ पर एक आम सभा का आयोजन भी किया गया.
इस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शारिक अंसार ने कहा, "यौन शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करके सरकार ने एक ऐतिहासिक भूल की है. हमें पता है कि ऐसा पश्चिमी देशों के दबाव के चलते किया गया है. यौन शिक्षा से एड्स पर तो काबू नहीं किया जा सकता है अलबत्ता इसे लागू करने से अप-संस्कृति और बेशर्मी को बढ़ावा ही मिलेगा."
सभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा और स्कूली पाठ्यक्रम से यौन शिक्षा को हटाने की माँग की.
इससे पहले योगगुरू बाबा रामदेव ने भी ऐसी ही माँग की थी.