शनिवार, 21 अप्रैल, 2007 को 13:43 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि राजनीति में धर्म के आधार पर लोगों की भावनाओं को भड़काना धर्म और संविधान के साथ धोखा है.
समाचार एजेंसियों के अनुसार दिल्ली में दो दिवसीय अंतरधार्मिक सदभावना सम्मेलन का उदघाटन करते हुए उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताक़तें देश की साझी संस्कृति की विरासत को कमज़ोर कर रही हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा,"जब हम ये कहते हैं कि हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है तो इसके मायने ये होते हैं कि धर्म और राजनीति दोनों अलग-अलग हैं."
अंतरधार्मिक सदभावना संगठन और भारतीय संस्कृतिक संबंध परिषद की तरफ़ से आयोजित इस सम्मेलन में सार्क देशों से आए नौ धर्मों के नेता हिस्सा ले रहे हैं.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा,"बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक का फ़र्क राजनैतिक और सामाजिक आधार पर किया जाता है. ये कोई आध्यात्मिक वर्गीकरण नहीं है."
मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि जब हम एक दूसरे को बराबर नज़र से देखते हैं तो इससे सदभावना और सहिष्णुता बढ़ती है. उन्होंने कहा कि सच्ची सदभावना एक दूसरे के सम्मान से ही आती है.
एक आधुनिक राष्ट्र के निर्माण में सामाजिक और राजैतिक विविधता को आधार तत्व बताते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, राष्ट्र चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन उसे आंतरिक विविधता का सम्मान करना चाहिए. कोई भी आधुनिक और खुला समाज असहिष्णु नहीं हो सकता.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की साझी संस्कृति की सोच और एक दूसरे की आस्था का सम्मान इसकी राष्ट्रीयता की अवधारणा का मुख्य आधार है.