बुधवार, 18 अप्रैल, 2007 को 07:33 GMT तक के समाचार
नेपाल में चल रहे अंतरराष्ट्रीय बाघ सम्मेलन में 'टाइगर बोन वाइन' नाम की एक शराब की वजह से चीन की तीखी आलोचना हो रही है.
ऐसी ख़बर है कि चीन में बनने वाली 'राइस वाइन' में बाघ की खाल को भिगोया जाता है और उससे ये तथाकथित 'टाइगर बोन वाइन' बनाई जाती है.
वाइन पीने वाले लोगों का मानना है कि इससे उनमें ताक़त आ जाती है.
इस सम्मेलन में चीन के प्रतिनिधि बाघ की हड्डियों और चमड़ी पर से प्रतिबंध उठाने की माँग कर रहे हैं.
लेकिन बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए अन्य एशियाई देश प्रतिबंध बरक़रार रखना चाहते हैं.
काठमांडू से बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड के अनुसार सम्मेलन में इस मामले को लेकर काफ़ी गर्मागर्म बहस हुई.
टाइगर फ़ार्म
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बाघों की तेज़ी से कम होती संख्या की कई वजह बताई गईं. लेकिन चीन के 'टाइगर फ़ार्म' पर खासी चर्चा हुई.
दरअसल चीन के 'टाइगर फ़ार्म' में हज़ारों बाघों को कैद करके दर्शकों के मनोरंजन के लिए रखा जाता है.
लेकिन सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे विश्व वन्य-जीव संगठन ( डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़) का कहना है कि इन टाइगर फ़ार्मों से ही 'टाइगर वाइन' का कच्चा माल तैयार किया जाता है.
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन से आए अधिकारियों का कहना था कि उनका देश बाघ के व्यापार पर से कुछ स्तर तक प्रतिबंध हटाएगा.
लेकिन नेपाल और बांग्लादेश के विशेषज्ञों ने अपने देशों में बाघों की कम होती संख्या को देखते हुए प्रतिबंध बरक़रार रखने की बात कही है.