शुक्रवार, 13 अप्रैल, 2007 को 13:30 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सिंधी पंचायत ने बिरादरी की युवतियों पर मोबाइल टेलीफ़ोन का इस्तेमाल करने, दो पहिया वाहन चलाने और स्कार्फ़ से चेहरे को ढंकने पर पाबंदी लगा दी है. इसकी वजह यह हो सकती है कि चेहरा ढंकने पर वे पहचान में नहीं आतीं.
पंचायत का यह फ़ैसला पिछले 15 दिनों में सिंधी समाज की दो लड़कियों के घर से भागकर प्रेमियों से शादी करने के बाद आया है. जिन युवकों से इन लड़कियों ने शादी की वे मुसलमान थे.
हालांकि सिंधी समाज के एक तबके ने इस फ़ैसले का विरोध किया है जिसमें महिलाएँ भी शामिल हैं.
पंचायत सदस्य और उमा भारती की राजनीतिक पार्टी भारतीय जनशक्ति के नेता भगवानदास सबनानी ने कहा, "बच्चे-बच्चियाँ माँ-बाप से मिली स्वतंत्रता का नाजायज़ फ़ायद उठा रहे हैं. बैठक में जब चिंतन हुआ तो लगा कि मोबाइल टेलीफ़ोन और सिर और चेहरे को दुपट्टे से ढंकना इसकी बड़ी वजह है."
हिंदू संगठन भी सक्रिय
हाल में हुए दो अंतर-जातीय विवाहों को लेकर सिंधी समाज में ख़ासा रोष है, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बजरंग दल जैसे संगठनों ने और बढ़ा दिया है.
आरएसएस के वरिष्ठ नेता उत्तम चंद इसरानी की निगरानी में भोपाल में कई बैठकें हुईं और उनका कहना है, "हिंदू युवतियों को मुस्लिम युवकों के चंगुल से बचाने के लिए हिंदू कन्या रक्षा समिति का गठन किया गया."
ग़ौरतलब है कि अप्रैल के शुरू में 23 साल की प्रियंका वाधवानी अपने मुस्लिम प्रेमी उमर के साथ मुंबई भाग गई थीं जहाँ ख़बरों के अनुसार उमर ने हिंदू धर्म अपनाया और दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज़ से शादी कर ली.
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर शहर में प्रदर्शन, सांकेतिक बंद और पुलिस अधिकारियों का घेराव कर, उमर की गिरफ़्तारी की माँग की है.
इस मामले में ऐसे भी आरोप लगे हैं कि पुलिस ने उमर के भाई शकील को कई दिनों तक पुलिस थाने में रखा.
हालांकि पुलिस उप-महानिरीक्षक अनुराधा शंकर का कहना है, ''मेरे विभाग ने उमर के परिवार वालों के अलावा लड़की के ख़ानदान और दूसरे लोगों से भी पूछताछ की है. यह सारी कार्रवाइयाँ क़ानून के दायरे में हुई हैं.''
उमर के परिजनों ने राज्यपाल बलराम जाखड़ से मिलकर मदद की गुहार लगाई. परिजनों के मुताबिक़ इसके बाद ही शकील की रिहाई मुमकिन हो पाई.
'औरतों की आज़ादी पर प्रहार'
अभी यह मामला गरम ही था कि चंद दिनों पहले इस प्रकार के दूसरे मामले में भोपाल की एक सिंधी लड़की नीतू जोधानी और मुस्लिम युवक रेहान के घर से भाग कर शादी करने की बात सामने आई.
इस मसले पर शहर में प्रदर्शन करने वाले बजरंग दल के कार्यकर्ता राजेंद्र गुप्ता ने कहा, ''एक साज़िश के तहत हिंदू युवतियों को बहला-फुसलाकर ऐसे कर्म को अंजाम दिया जा रहा है और दूसरे समाज को इसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए.''
हिंदूवादी संगठन ने इस मसले पर शनिवार को भी भोपाल बंद का आह्वान किया है. इसके अलावा ये संगठन प्रियंका और उमर की शादी को कोर्ट के वैध ठहराने के फ़ैसले को भी चुनौती देंगे. उनका कहना है कि फ़ैसला देने से पहले लड़की के घरवालों का पक्ष नहीं सुना गया.
इस बीच सिंधी पंचायत के फ़रमान के विरोध में भी आवाजें उठने लगी हैं. महिला सशक्तिकरण की पक्षधर दविंदर कौर उप्पल ने इसे 'औरतों की आज़ादी पर प्रहार' बताया है.
उन्होंने कहा कि आज जब औरतें बराबरी के हक़ की लड़ाई लड़ रही है तो ऐसे फ़ैसलों का घोर विरोध होना चाहिए.