गुरुवार, 12 अप्रैल, 2007 को 19:39 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकारा है कि उनकी सेना विदेशी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कबायली लड़ाकों का साथ दे रही है.
उन्होंने बताया कि स्थानीय पश्तून लड़ाकों ने पिछले कुछ हफ़्तों से चल रहे संघर्ष में क़रीब 300 विदेशी चरमपंथियों को मार दिया है.
हालांकि स्थानीय सूत्रों की मानें तो संघर्ष में मारे गए लोगों की तादाद 100 से भी कम हो सकती है.
ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ सप्ताह से अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इलाकों में विदेशी चरमपंथियों और स्थानीय कबायली गुटों के बीच संघर्ष चल रहा है.
पाकिस्तान की सेना की ओर से पहले तो इस बात का खंडन किया जाता रहा है कि वे स्थानीय कबायली लड़ाकों की कोई मदद कर रही है पर अब उन्होंने स्वीकारा है कि विदेशी चरमपंथियों को भगाने के लिए जारी संघर्ष में वे स्थानीय गुटों की मदद कर रहे हैं.
जिन विदेशी चरमपंथियों को इस इलाके से निकालने के लिए संघर्ष जारी है उनमें से कुछ अल- क़ायदा और तालेबान के भी सदस्य बताए जा रहे हैं.
संघर्ष
दरअसल, दक्षिणी वजीरिस्तान के इस इलाके में विदेशी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कबायली लोगों ने कुछ सप्ताह पहले घोषित रूप से विरोध और संघर्ष शुरू कर दिया है.
कबायली गुटों का आरोप है कि उज़्बेक मूल के चरमपंथी अपराधियों जैसा व्यवहार कर रहे हैं.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा, "हम चाहते हैं कि उत्तरी वजीरिस्तान में भी इस तरह का अभियान चले और वहाँ से इसी तरह के संकेत भी मिल रहे हैं. "
इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता के मुताबिक संभव है कि पाकिस्तान सेना उज़्बेक चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जारी संघर्ष को अपना समर्थन और प्रचार इसलिए देना चाहती हो क्योंकि उसके ऊपर पश्चिमी देशों से इस बात के लिए दबाव पड़ रहा है कि वे विदेशी चरमपंथियों को निकालने में कबायली गुटों की मदद करें.
उधर नैटो ने इस बात की चिंता जताई है कि ये चरमपंथी अफ़ग़ानिस्तान का रुख कर सकते हैं.