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बुधवार, 11 अप्रैल, 2007 को 15:30 GMT तक के समाचार

मेघालय में जनजातीय नेताओं की धमकी

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में दूसरे देशों के मज़दूरों को राज्य छोड़कर चले जाने की जनजातीय नेताओं की धमकी के बाद पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की है.

राज्य की कोयला खदानों में काम करने वाले ज़्यादातर श्रमिक कथित तौर पर नेपाली और बंग्लादेशी हैं.

जनजातीय नेताओं की इस धमकी के बाद से डरे हुए इन मजदूरों में अफ़रा-तफरी मच गई है.

जनजातीय नेताओं ने राज्य छोड़कर चले जाने के लिए एक मई तक की मोहलत दी है और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी है.

पूर्वोत्तर क्षेत्र के दूसरे राज्यों की तरह मेघालय में भी वर्षों से प्रवासी विरोधी हिंसा होती रही हैं. गत जनवरी में असम में पृथकतावादियों के हाथों क़रीब 80 हिंदी भाषी मारे गए थे.

पिछले सप्ताह मेघालय के पश्चिमी खासी बहुल ज़िले बोरसोरा से नोंगकालांग गाँव तक फैली कोयला खदानों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के बीच हज़ारों ऐसे परचे बाँटे गए जिसमें मेघालय छोड़कर चले जाने की चेतावनी दी गई थी.

बंगाली, हिंदी और नेपाली बोलने वाले ये मजदूर तभी से डर के साए में जी रहे हैं और कुछ ने तो पहले ही भागकर पड़ोसी राज्यों असम और पश्चिम बंगाल में शरण ले ली है.

बाक़ी बचे मजदूरों का भी कहना है कि यदि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मुहैया कराई गई तो उन्हें भी भागना पड़ सकता है.

अब पुलिस शांति बनाए रखने की अपील की है और सुरक्षा उपायों के ज़रिए इन मजदूरों का डर दूर करने की कोशिश कर रही है.

ज़िले के अतिरिक्त पुलिस उपाधीक्षक एस नोंग्तगर ने कहा, "कुछ स्थानीय समूह समय-समय पर ऐसी धमकियाँ जारी करते रहते हैं लेकिन किसी को घबराना नहीं चाहिए. हम सब की सुरक्षा करेंगे."

लेकिन खासी, जयंतिया और गारो समुदायों के संघ एफकेजेजीपी इन सभी प्रवासी मजदूरों को राज्य से निकाल बाहर करने को कटिबद्ध है. खासी, जयंतिया और गारो इस राज्य के तीन मुख्य जनजातीय समुदाय हैं.

इस संघ के अध्यक्ष एमलांग लायटन कहते हैं, "अब बहुत हो चुका और राज्य सरकार को अवैध प्रवासियों के मामले को गंभीरता से लेना होगा, नहीं तो स्थानीय लोग कानून अपने हाथ में ले लेंगे."

चेतावनी

लायटन ने बीबीसी को बताया, "बांग्लादेश और नेपाल से आकर हज़ारों प्रवासी स्थानीय कोयला खादानों में बस गए हैं. वे इन क्षेत्रों में जुआ और दूसरे अवैध कार्य भी अपने साथ लेकर आए. हम इन्हें निकाल बाहर करने के लिए कृतसंकल्प हैं."

वह आगे चेतावनी देते हैं, "यदि वे एक मई तक राज्य छोड़कर नहीं चले जाते तो हम किसी को नहीं बख़्शेंगे."

इस संघ ने एक अप्रैल को राजधानी शिलांग में बैठक करके राज्य छोड़ने की चेतावनी जारी करने का फैसला किया था. कोयला क्षेत्र में आनेवाले नोंग्ज्री बाजार में प्रवासियों की कुछ दुकानों पर हमले भी किए गए.

प्रशासन

उधर राज्य पुलिस ने इसे छोटी-मोटी घटना क़रार देकर ख़ारिज कर दिया है. मेघालय सरकार ने कहा है कि वह राज्य में सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा करने के लिए वचनबद्ध है.

मुख्यमंत्री डी डी लापांग ने कहा है कि संघ की चेतावनी को बहुत अधिक गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए.

मेघालय के जनजातीय लोगों में हमेशा यह डर बना रहता है कि प्रवासी उन्हें आबादी में पीछे छोड़ देंगे. 1980 के दशक से ही राज्य में बंगाली और नेपाली बोलने वाले प्रवासियों पर हमले होते रहे हैं.