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बुधवार, 11 अप्रैल, 2007 को 08:24 GMT तक के समाचार

हबीब बेरी
बीबीसी संवाददाता, बंगलौर

राष्ट्रगान पर टिप्पणी के लिए क्षमा

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की अग्रणी कंपनियों में से एक इन्फ़ोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने भारतीय राष्ट्रगान के बारे में की गई अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए माफ़ी माँगी है.

नारायण मूर्ति ने रविवार को राष्ट्रगान के बारे में कथित टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस गीत से 'विदेशियों को परेशानी' हो सकती है.

भारत के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने पिछले दिनों इन्फ़ोसिस के मैसूर स्थित परिसर का दौरा किया था जिसके दौरान नारायण मूर्ति ने यह कथित टिप्पणी की थी.

उनकी इस टिप्पणी पर कई राजनेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी.

इसके बाद नारायण मूर्ति ने कहा है कि अगर उनके बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँची है तो वो इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं.

गाना नहीं, धुन

दरअसल, राष्ट्रपति के इस दौरे के दौरान आयोजित समारोह में राष्ट्रगान गाया नहीं गया था बल्कि इसकी धुन बजाई गई थी.

यह पूछे जाने पर कि गाने के बजाय राष्ट्रगान की केवल धुन ही क्यों बजाई गई, नारायण मूर्ति ने कहा था कि कंपनी के ऐसे सदस्य जो विदेशी मूल के हैं, उन्हें राष्ट्रगान गाने से परेशानी हो सकती है.

राज्य की भारतीय जनता पार्टी इकाई ने इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह मामला राज्य विधानसभा में भी उठाया.

बाद में नारायण मूर्ति की ओर से जारी बयान में कहा गया कि गाने के बजाय धुन बजाने का निर्णय इसलिए लिया गया ताकि सभी लोग अपने स्तर पर तय कर सकें कि वे राष्ट्रगान गाना चाहते हैं या नहीं.