http://www.bbcchindi.com

शिल्पा कन्नन
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

ड्राइविंग के दौरान धूम्रपान पर पाबंदी

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप सोमवार से दिल्ली में चलने वाले वाहनों के लिए नए नियम लागू हो गए. ड्राइविंग के दौरान धूम्रपान करने पर रोक होगी.

दुनिया के किसी भी मुल्क में शायद यह पहली बार है जब ड्राइविंग के दौरान धूम्रपान करना प्रतिबंधित किया गया है.

न्यायालय ने पिछले दिनों 'राजधानी की सड़कों को आदमी की जिंदगी के लिए ख़तरनाक' घोषित करते हुए सड़कों पर यातायात सुधारने के लिए क़दम उठाए थे.

नए नियमों के अनुसार ड्राइविंग के दौरान धूम्रपान करने पर तो प्रतिबंध रहेगा ही, साथ ही मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल की भी अनुमति नहीं होगी.

दिल्ली यातायात पुलिस के अनुसार राजधानी में हर साल आठ हज़ार से अधिक सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं और इनमें दो हज़ार से अधिक लोग मारे जाते हैं.

बिगड़ती स्थिति

दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील राजीव अवस्थी की जनहित याचिका पर यातायात व्यवस्था सुधारने के कई निर्देश जारी किए.

याचिका में कहा गया था, "मैं हर रोज चार से पाँच घंटे सड़कों पर गुजारता हूँ. जिस तरह से लोग दिल्ली में वाहन चलाते हैं, उससे मैं बुरी तरह परेशान हो जाता हूँ. लोगों को ट्रैफिक की कोई समझ नहीं है. चालक बहुत आक्रामक हैं और लोगों को सड़क पर कुचल देना चाहते हैं."

हाईकोर्ट ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को सभी आठ हज़ार ड्राइवरों को वर्दी पहनना सुनिश्चित करने और ड्राइवरों को भर्ती करने की शैक्षिक योग्यता बारहवीं करने के निर्देश दिए.

हाईकोर्ट ने सभी वाहनों से काली फ़िल्म लगे शीशों पर पाबंदी लगा दी.

दिल्ली में हर दिन लगभग चालीस लाख वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं और ये संख्या मुंबई, कोलकाता और चेन्नई महानगरों के कुल वाहनों से अधिक है.

यातायात पुलिस ने सोमवार से नए नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए राजधानी में 80 जगहों पर 2000 से अधिक सिपाहियों को तैनात किया है.

आम तौर पर शहर की सड़कों पर ध्वनि स्तर 60 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन दिल्ली में इसका स्तर 80 डेसीबल है.

भारी वाहनों के चलने के समय तो यह स्तर 100 डेसीबल तक पहुँच जाता है.

न्यायालय ने तेज़ हार्न बजाने पर भी पाबंदी लगा दी है.

राजीव को उम्मीद है कि नए नियमों से यातायात की व्यवस्था में सुधार आएगा और नियमों को प्रभावशाली तरीके से लागू किया जा सकेगा.

निगरानी

न्यायालय ने इन नियमों के क्रियान्वयन पर नज़र रखने के लिए एक समिति का भी गठन किया है.

इस समिति में राजीव समेत डीटीसी के अध्यक्ष, यातायात पुलिस के संयुक्त आयुक्त, दिल्ली सरकार के परिवहन सचिव शामिल हैं.

लेकिन अधिकतर ड्राइवर इन क़दमों के असर को लेकर सशंकित हैं.

40 वर्षीय ड्राइवर सुशील कुमार का कहना है कि जब तक इन नियमों को उचित तरीके से लागू नहीं कराया जाता, ऐसे आदेश जारी करने का कोई लाभ नहीं है.