सोमवार, 09 अप्रैल, 2007 को 12:39 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
उत्तर प्रदेश के चुनाव से संबधित विवादित सीडी के मुद्दे पर भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस और माकपा भी जनमोर्चा और बसपा के साथ आ गई हैं.
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को दी अपनी याचिका मे कहा है की ये पहली बार नहीं है कि भाजपा ने इस तरह की आपत्तिजनक सीडी निकाली है.
कांग्रेस नेताओं अशोक गहलोत और कपिल सिब्बल ने सोमवार को चुनाव आयोग जाकर पार्टी का पक्ष रखा.
पार्टी ने इस मामले मे सीबीआई जाँच की माँग भी की है.
कांग्रेस
सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा, " भाजपा ने लखनऊ में हुई राष्ट्रीय परिषद की बैठक में ऐसा ही सीडी बनाई थी जो पत्रकारों को मीडिया किट में बाँटी गई थी. वो भी इतनी आपत्तिजनक है कि हमने उसे भी आयोग के सामने पेश किया है. साथ ही हमने कहा कि ऐसे ही सीडी इन्होंने गुजरात में भी बड़ी तादाद में बाँटी हैं."
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए चुनाव आयोग से दो दिन का समय माँगा है, चुनाव आयोग अब इस मामले की सुनवाई बुधवार को करेगा.
भाजपा को ये अहसास है की इस मुद्दे पर वो फँस गई है.
सफ़ाई
उसने अब तय कर लिया है कि वो चुनाव आयोग के सामने तकनीकी तौर पर सफ़ाई तो पेश करेगी, लेकिन चुनाव के माहौल में इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा मे नज़र नहीं आएगी.
इसी रणनीति के तहत पार्टी ने उतरप्रदेश मे इस मुद्दे के बहाने अपने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतारा.
सूत्रों के अनुसार भाजपा ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिख कर उसके एक सदस्य नवीन चावला को सीडी मामले की सुनवाई से अलग रखने का आग्रह किया है.
भाजपा का आरोप रहा है की नवीन चावला कांग्रेस के करीबी हैं और उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं.
अपना पक्ष रखने के बाद भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, " हमने जवाब दे दिया है. लेकिन सभी राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर जबरन घुसती चली आ रही हैं."
सज़ा मिले
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, एसआर पिल्लै और बसपा नेताओं ने चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखी.
वीपी सिंह ने कहा, " भाजपा ने आयोग से इस मुद्दे को चुनाव होने तक टाल देने के लिए कहा है. उनका क्या है. उन्होंने तो इंजेक्शन दे दिया, ज़हर फैला दिया. अब उनकी बला से मरीज मरे तो मरे."
वीपी सिंह ने कहा कि भाजपा ने न केवल जनप्रतिनिधित्व क़ानून, बल्कि भारतीय दंड संहिता का भी उल्लंघन किया है.
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह द्वारा इस मुद्दे पर गिरफ़्तारी देने के फ़ैसले पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, "उन्होंने गिरफ़्तार होने लायक काम किया तो गिरफ़्तार तो होंगे ही."
चुनौती
चुनाव आयोग ने इस मामले मे कड़ा रूख अपनाते हुए राजनाथ सिंह और लालजी टंडन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज़ करा दी है, और अब उसके सामने राष्ट्रीय दल के तौर पर अपनी मान्यता बनाए रखने की चुनौती है.
हालाँकि जानकार कहते हैं कि चुनाव आयोग शायद ही भाजपा की मान्यता समाप्त करने जैसा बड़ा क़दम उठाए पर भाजपा इस मुद्दे से जब तक बरी नहीं हो जाती तब तक इस मुद्दे को वो हल्के से भी नहीं ले सकती.
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों चुनाव प्रचार में इस्तेमाल की जा रही एक सीडी को लेकर भाजपा के कई नेता विवादों के घेरे में आ गए थे.
इस सीडी में कई ऐसी बातों की ज़िक्र होने की बात कही जा रही है जो सांप्रदायिकता भड़काने वाली हैं.
इसमें कई ऐसी बातें कही गई थीं जो मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ भड़काने वाली थीं.