रविवार, 08 अप्रैल, 2007 को 12:50 GMT तक के समाचार
नई दिल्ली में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने एक-दूसरे को अपनी-अपनी सीमा में रहने की नसीहत दे डाली.
इस सम्मेलन में मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों ने भी हिस्सा लिया. सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सलाह दी कि न्यायपालिका को सीमा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने कहा कि अदालतों, विधायिका और कार्यपालिका के बीच जो तनाव दिखता है, वह स्वस्थ लोकतंत्र में स्वाभाविक है.
हालाँकि उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता की वकालत की और ख़ास तौर पर संसद और विधायिका के फ़ैसले की समीक्षा के अधिकार को बिल्कुल सही बताया.
उन्होंने कहा, "विधायिका के फ़ैसले की संवैधानिकता और कार्यपालिका के फ़ैसले की समीक्षा के कारण कभी-कभी जज, विधायिका और कार्यपालिका में तनाव पैदा हो जाता है लेकिन स्वस्थ लोकतंत्र में यह स्वभाविक है."
न्यायपालिका की स्वतंत्रता
बालाकृष्ण ने कहा कि देश में क़ानून के राज़ के लिए न्यायिक स्वतंत्रता ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि विधायिका के फ़ैसले की समीक्षा का अधिकार एक क़ानूनी हथियार है और कई बार इसे ग़लती से न्यायपालिका के वीटो पॉवर की तरह समझ लिया जाता है.
सम्मेलन में इसके बाद बारी आई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने. उन्होंने कहा, "न्यायिक सक्रियता और न्यायपालिका के कार्यक्षेत्र में बीच बहुत पतली रेखा होती है और अगर एक ने दूसरे का काम करना शुरू कर दिया तो ये कार्यक्षेत्र में दखल हो जाता है."
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन का बयान ऐसे समय आया है जब एक बार फिर न्यायपालिका और विधायिका के कार्यक्षेत्र को लेकर विवाद चल रहा है.
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के सरकार के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी और कहा था कि आरक्षण के लिए वर्ष 1931 के आँकड़े को आधार बनाया जा रहा है.
रविवार को मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि न्यायपालिका का पहला दायित्व क़ानून के शासन को लागू करना और संविधान की रक्षा करना है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका के पास शक्तियाँ हैं लेकिन वह विधायिका और कार्यपालिका के काम को नहीं संभाल सकती.