शनिवार, 07 अप्रैल, 2007 को 13:54 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत में सुन्नी और शिया समुदाय के लोगों के बीच हुई झड़पों में 40 लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं.
ख़बरों के अनुसार झड़पें तब शुरू हुईं जब कुछ बंदूकधारियों ने पाराचिनार में शिया समुदाय के लोगों पर गोलीबारी की.
पाराचिनार पेशावर से क़रीब 250 किलोमीटर दूर है. अधिकारियों ने क़स्बे में कर्फ़्यू लगा दिया है और क़ानून व्यवस्था क़ायम करने के लिए सैनिक भी भेजे हैं.
कुर्राम क़बायली इलाक़े में वरिष्ठ अधिकारी साहिबज़ादा मोहम्मद अनीस ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि झड़पों के दौरान दोनों तरफ़ से भारी गोलीबारी हुई.
उन्होंने बताया कि हैलीकॉप्टर से दोनों पक्षों पर गोलीबारी की गई और अगर लड़ाई रुकी नहीं तो फिर से गोलीबारी होगी.
जातीय हिंसा
पाकिस्तान में जातीय हिंसा की कई घटनाएँ हो चुकी हैं. पाकिस्तान की क़रीब 15 करोड़ आबादी में से लगभग 80 प्रतिशत आबादी सुन्नी मुसमलानों की है.
हालाँकि ज़्यादातर शिया और सुन्नी एक दूसरे के साथ अमन-चैन से रहते हैं लेकिन दोनों समुदायों में कट्टरपंथी विचार रखने वाले लोग एक दूसरे के समुदायों को जब-तब निशाना भी बनाते हैं.
शुक्रवार, 27 मई, 2005 को राजधानी इस्लामाबाद में एक सूफ़ी दरगाह में भयंकर बम विस्फोट में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई थी और अनेक लोग घायल हो गए थे.
इससे पहले एक अप्रैल, 2005 को लाहौर में मोटरसाइकिल पर सवार कुछ बंदूकधारियों ने एक शिया विद्वान की हत्या कर दी थी. दो लोग घायल भी हुए थे.
बीस मार्च, 2005 को दक्षिण-पश्चिमी शहर फ़तेहपुर में एक दरगार पर बम हमले हुए थे जिनमें 39 लोगों की जानें चली गई थीं. उस वक़्त श्रद्धालु दरगाह पर रात का खाना खा रहे थे.
जबकि जनवरी, 2005 में पाकिस्तान के उत्तरी शहर गिलगित में एक वरिष्ठ शिया मौलवी की हत्या के बाद शिया और सुन्नियों के बीच झड़पें हुईं. हिंसा में 17 लोगों की मौत हो गई और गिलगित में कई सप्ताह तक कर्फ़्यू लगाया गया था.